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दिल्ली एम्स में बड़ी लापरवाही आई सामने, बदली मरीजों की जांच रिपोर्ट

Mon, 10 Sep 2018 10:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 10 Sep 2018 10:40 PM IST
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major irresponsibility in Delhi AIIMS, replacement patients report

देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां एक मरीज के कार्ड पर किसी और की रक्त जांच का बारकोड लगाया जा रहा है। ऐसा एक-दो बार नहीं, बल्कि लगातार सामने आ रहा है। रक्त संग्रहण केंद्र इस लापरवाही के पीछे स्टाफ की कमी को कारण बता रहा है।

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दरअसल, एम्स में हर दिन करीब 8 से 10 हजार मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। इनमें से चार से पांच हजार मरीजों को विभिन्न विभागों के डॉक्टर रक्त जांच के लिए प्रयोगशाला भेजते हैं। यहां मरीज से रक्त सैंपल लेने के बाद उसे एक बारकोड दिया जाता है, जिसे ओपीडी कार्ड पर ही चस्पा करना होता है। सूत्रों की मानें तो इसी प्रक्रिया में गड़बड़ी शुरू होती है। आखिर में मरीज को किसी और की रक्त जांच रिपोर्ट मिल रही है। इस लापरवाही को लेकर करीब 2 साल पुराने मरीजों के दस्तावेज एम्स से बाहर आए हैं। इनमें कई मरीजों को गलत बारकोड मिलने का खुलासा हुआ है।
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एक बयान में एम्स के रक्त संग्रहण केंद्र के डॉ. प्रकाश का कहना है कि यहां रोज चार से पांच हजार मरीजों के रक्त नमूने जांच के लिए आते हैं, जबकि स्टाफ करीब 10 हैं। ऐसे में तकनीकी खामी होना स्वाभाविक है। मरीज रिपोर्ट लेकर जाता है तो उन्हें विश्वास है कि डॉक्टर मरीज से सही रिपोर्ट का जिक्र करता होगा। एम्स प्रबंधन की ओर से इस लापरवाही पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

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बेबी के कार्ड पर सुशीला देवी का बारकोड

एम्स के ईएनटी विभाग में 25 जनवरी 2017 को हुमायूंपुर निवासी 25 वर्षीय बेबी के ओपीडी कार्ड पर एक नहीं, बल्कि तीन बार सुशीला देवी नामक मरीज का बारकोड चस्पा किया गया। मरीज के पास अब एम्स की जांच रिपोर्ट भी नहीं है और न ही उसने गलत बार कोड पर ध्यान दिया। अंसारी नगर निवासी विजय राम ने इसकी शिकायत डॉक्टरों से की थी। 15 नवंबर 2017 को एम्स के मनोरोग विभाग में इलाज कराने पहुंचे विजय राम के कार्ड पर हरी चंदेल नामक किसी और मरीज का बारकोड लगा दिया गया और रिपोर्ट दे दी। विजय राम की रिपोर्ट पर निगाह गई तो उसने शिकायत विभागीय डॉक्टर से भी की। इसके बाद प्रयोगशाला से दूसरी रिपोर्ट दी गई।

कई बार सैंपल ही हो जाते हैं गायब
एम्स में पिछले कुछ समय से रक्त नमूने (सैंपल) खो जाने की शिकायत भी सामने आ रही हैं। यहां आने वाले मरीजों को नमूना खो जाने का हवाला दिया जाता है। इसके चलते मरीज को दोबारा उसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके कारण मरीज को इलाज मिलने में काफी समय लगता है।

लापरवाही हो सकती है आपराधिक
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के सचिव डॉ. गिरीश त्यागी का कहना है कि एम्स जैसे संस्थान में इस तरह की घटना हो रही है तो यह काफी गंभीर विषय है। इसे लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक गतिविधि कहेंगे, क्योंकि इसकी वजह से मरीजों को गलत उपचार मिल सकता है।

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