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अलवर भीड़ हिंसा: मेवात में लगी महापंचायत, रकबर को किया सम्मानित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेवात
Updated Sun, 29 Jul 2018 02:12 PM IST
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lynching
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अलवर भीड़ हिंसा मामले को लेकर कोल गांव में मेवात के मेयो मुसलमानों ने महापंचायत आयोजित किया। इस पंचायत में भीड़ हिंसा का शिकार बनें रकबर को कोल गांव में सम्मानित किया।
क्या है मामला
21 जुलाई की रात ललावंडी गांव में गोतस्करी के शक में भीड ने कोलगांव हरियाणा निवासी रकबर को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस रकबर और दोनों गायों को रामगढ थाने ले आई।
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रात करीब साढ़े तीन बजे दोनों गायों को थाने से सात किलोमीटर दूर सुधासागर गोशाला में छुड़वाया गया। जबकि घायल रकबर की मौत हो गई। इस मामले में दर्ज एफआईआर में पुलिस ने बताया कि रकबर और उसका साथी बड़ौदामेव के लाडपुर से दुधारू गाय खरीदकर ललावंडी के रास्ते से कोलगांव लेकर जा रहे थे।
इस मामले में जब लाडपुर के मल्ला और सुनने खां के परिजनों से बातचीत की तो, उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गाय नहीं बेची है।
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#Haryana: Maha panchayat of Mewat's Meo Muslims being held in Kol village over Alwar lynching incident. Rakbar, victim of Alwar lynching incident hailed from Kol village. pic.twitter.com/VQ7QvOflM5
— ANI (@ANI) July 29, 2018
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क्या है मामला
21 जुलाई की रात ललावंडी गांव में गोतस्करी के शक में भीड ने कोलगांव हरियाणा निवासी रकबर को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था। मामले की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस रकबर और दोनों गायों को रामगढ थाने ले आई।
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रात करीब साढ़े तीन बजे दोनों गायों को थाने से सात किलोमीटर दूर सुधासागर गोशाला में छुड़वाया गया। जबकि घायल रकबर की मौत हो गई। इस मामले में दर्ज एफआईआर में पुलिस ने बताया कि रकबर और उसका साथी बड़ौदामेव के लाडपुर से दुधारू गाय खरीदकर ललावंडी के रास्ते से कोलगांव लेकर जा रहे थे।
इस मामले में जब लाडपुर के मल्ला और सुनने खां के परिजनों से बातचीत की तो, उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गाय नहीं बेची है।