Mukhtar Ansari: अवधेश राय हत्याकांड में माफिया मुख्तार को मिली थी ताउम्र कैद की सजा, केस ने निकाल दी थी हेकड़ी
कोयले के कारोबार और सरकारी ठेकों में दखल के साथ ही जिला जेल में मुख्तार अंसारी के गुर्गों की पिटाई चेतगंज थाने के हिस्ट्रीशीटर अवधेश राय की हत्या की अहम वजह बनी थी। मामले में माफिया मुख्तार को ताउम्र कैद की सजा मिली थी।
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माफिया मुख्तार अंसारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी को दिल का दौरा पड़ने के बांद मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मुख्तार अंसारी पर कई केस दर्ज थे, लेकिन वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 33 साल पुराने अवधेश राय हत्याकांड में मुख्तार अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोयले के कारोबार और सरकारी ठेकों में दखल के साथ ही जिला जेल में मुख्तार अंसारी के गुर्गों की पिटाई चेतगंज थाने के हिस्ट्रीशीटर अवधेश राय की हत्या की अहम वजह बनी थी। हत्या सहित अन्य आपराधिक आरोपों में दर्ज 19 मुकदमों के आरोपी रहे अवधेश राय का दबदबा वाराणसी से गाजीपुर होते हुए पूर्वांचल में तेजी से बढ़ रहा था।
नब्बे के दशक में मुख्तार अंसारी गिरोह ने बनारस में पैर पसारना शुरू किया तो उनकी राह में दबंग किस्म के अवधेश राय एक बड़ा रोड़ा थे। मुख्तार अंसारी गिरोह बनारस के व्यापारियों से रंगदारी मांगता था तो अवधेश राय ढाल बन कर खड़े हो जाते थे। नतीजतन, अवधेश राय को रास्ते से हटाने की साजिश रचकर सुनियोजित तरीके से तीन अगस्त 1991 को उनकी हत्या उनके घर के सामने ही कर दी गई।
दरअसल, वर्ष 1990 में अवधेश राय और एक पूर्व एमएलसी के बड़े भाई वाराणसी की जिला जेल में बंद थे। उस दौरान मुख्तार अंसारी के गिरोह के कुछ सदस्य भी इसी जेल में थे। पूर्व एमएलसी के बड़े भाई से मुख्तार अंसारी के गुर्गों से किसी बात पर नोकझोंक हुई और बात मारपीट तक पहुंच गई। पूर्व एमएलसी के बड़े भाई ने अवधेश राय से मदद मांगी। इस पर अवधेश राय ने मुख्तार अंसारी के साथियों की सलाखों के पीछे जमकर पिटाई की। इस घटना के बाद मुख्तार अंसारी इस कदर खार खाया कि अवधेश को ठिकाने लगाने की ठान ली। पहले रेकी कराई गई, गोली मारकर अवधेश की हत्या कर दी गई। इसके बाद बदमाश अपना वाहन छोड़कर गलियों से ही होते हुए भाग निकले।
अवधेश के आपराधिक इतिहास को बचाव पक्ष ने बनाया था ढाल
न्यायालय में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अवधेश राय पर हत्या सहित अन्य आपराधिक मामलों में दर्ज 19 मुकदमों को अपना ढाल बनाया था। न्यायालय में अभियुक्त के अधिवक्ता की ओर से चेतगंज थाने में दर्ज 10, सिगरा थाने के छह और कैंट के दो और शिवपुर में एक मुकदमे का विवरण भी प्रस्तुत किया था। इसमें मुख्तार की ओर से यह कहा गया कि अवधेश राय का आतंक समाज में व्याप्त था और उनके कई दुश्मन थे। इस घटना से पहले दुश्मनों ने मृतक के विरुद्ध कई मुकदमे दर्ज कराए थे।
मिली थी ये सजा
अदालत ने मुख्तार अंसारी को 148, 149 और 302 के तहत दोषी पाया था। उन्हें आजीवन कारावास की सजा के साथ एक लाख का जुर्माना भी लगाया था। जुर्माना न भरने की पर मुख्तार को छह महीने जेल में और रहना पड़ता। इसके अलावा एक अन्य धारा के तहत 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया था। उसे न चुकाने पर सजा में तीन महीने और बढ़ जाते।