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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Low voter turnout in elections... the question of trust looms larger year after year.

Delhi NCR News: चुनाव में कम मतदान...साल-दर-साल बड़ा होता भरोसे का सवाल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 06:33 PM IST
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कम मतदान सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि छात्रों और छात्र राजनीति के बीच बदलते रिश्ते का संकेत भी है
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संतोष कुमार
नई दिल्ली।दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में पिछले 15 दिनों से कैंपस नारों, पोस्टरों और प्रचार से गूंजता रहा, लेकिन मतदान के दिन बड़ी संख्या में छात्र इससे दूर रहे। करीब 1.50 लाख मतदाताओं वाले चुनाव में मतदान 40 फीसदी के आसपास सिमट गया। मतदान केंद्रों पर भी अपेक्षाकृत छोटी कतारें नजर आईं। कम मतदान की यह तस्वीर नई नहीं है। पिछले करीब दो दशकों के आंकड़े भी डूसू चुनाव में सीमित छात्र भागीदारी की लगातार बनी प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं। ऐसे में हर चुनाव के साथ यह सवाल बड़ा हो रहा है कि क्या छात्र संघ छात्रों का भरोसा कायम रख पा रहा है।
कम मतदान को केवल छात्रों की राजनीतिक उदासीनता मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। छात्रों से बातचीत में सामने आता है कि उनकी दूरी राजनीति से कम और ऐसी राजनीति से ज्यादा है, जिसका असर उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई नहीं देता। श्री अरबिंदो कॉलेज के तृतीय वर्ष के छात्र अनंत यादव कहते हैं कि हर चुनाव में मेट्रो पास, महिला सुरक्षा और कॉलेज की मूलभूत सुविधाओं जैसे मुद्दे उठते हैं, लेकिन चुनाव के बाद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखता। मोती लाल नेहरू कॉलेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा मुस्कान के मुताबिक, लगातार पूरे न होने वाले वादों से छात्र संघ के प्रति भरोसा कमजोर हुआ है।
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सबसे बड़ा नया वोट बैंक, लेकिन चुनावी प्रक्रिया से कम जुड़ाव
डूसू चुनाव में प्रथम वर्ष के करीब 80 हजार छात्र नए मतदाता हैं। इस बार शैक्षणिक सत्र 28 जुलाई से शुरू हुआ, जबकि दाखिला प्रक्रिया अगस्त के मध्य तक चली। ऐसे में नए छात्रों को विश्वविद्यालय और कॉलेज की व्यवस्था समझने के लिए ही सीमित समय मिला। उम्मीदवारों और छात्र संगठनों की जानकारी हासिल करने के साथ मुद्दों के आधार पर फैसला लेना उनके लिए चुनौती बन जाता है। यानी वोटरों का सबसे बड़ा नया वर्ग चुनाव के समय राजनीतिक रूप से सबसे कम तैयार रहता है।
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दूरदराज के कॉलेजों तक प्रचार की सीमित पहुंच
डीयू का विस्तार नॉर्थ और साउथ कैंपस से आगे पूर्वी और बाहरी दिल्ली तक है। सीमित प्रचार अवधि में उम्मीदवारों के लिए सभी कॉलेजों तक प्रभावी पहुंच बनाना आसान नहीं होता। दयाल सिंह कॉलेज के तृतीय वर्ष के छात्र अभिषेक बताते हैं कि उनके कॉलेज में उम्मीदवार प्रचार के लिए नहीं पहुंचे। इससे चुनाव कुछ प्रमुख कैंपस तक सीमित महसूस होने लगता है और कई छात्रों का जुड़ाव कमजोर रहता है।


राष्ट्रीय राजनीति हावी, छात्र मुद्दे पीछे
डूसू चुनाव में धनबल, बाहुबल और नियमों के उल्लंघन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। 2026 के प्रचार के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंसा और चुनावी नियमों के उल्लंघन पर सख्त टिप्पणियां कीं। 2024 में भी चुनावी प्रक्रिया और नतीजों को लेकर अदालत का हस्तक्षेप हुआ था। भाजपा और कांग्रेस से जुड़े छात्र संगठनों के बीच मुकाबले से चुनाव का दायरा राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंच जाता है। ऐसे में फीस, हॉस्टल, परिवहन, सुरक्षा और कॉलेज की मूलभूत सुविधाओं जैसे सीधे छात्र जीवन से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। कम मतदान इसलिए सिर्फ एक चुनावी आंकड़ा नहीं, बल्कि छात्रों और छात्र राजनीति के बीच बदलते रिश्ते का संकेत भी है। लगातार सीमित भागीदारी के बीच डूसू के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह छात्रों की रोजमर्रा की समस्याओं और अपेक्षाओं से अपना जुड़ाव कैसे मजबूत करता है।

कब कितना मतदान
वर्ष.........
मतदान प्रतिशत
2007.........
40.00%
2008.........
39.80%
2009.........
37.00%
2010.........
35.00%
2011.........
35.00%
2012.........
40.40%
2013.........
43.38%
2014.........
44.43%
2015.........
43.30%
2016.........
37.00%
2017.........
42.80%
2018.........
44.46%
2019.........
39.90%
2020......... कोविड से चुनाव नहीं हुआ
2021......... कोविड से चुनाव नहीं हुआ
2022......... कोविड से चुनाव नहीं हुआ
2023......... 42.00 %
2024.........
35.2%
2025.........
39.36%
2026.........40.46%
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