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आम छात्रों के लिए जिले में नहीं है एमएससी की पढ़ाई, परास्नातक करने के लिए जाना होगा बाहर
संदीप वर्मा, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Fri, 10 Aug 2018 04:01 AM IST
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एक तरफ तो नोएडा और ग्रेटर नोएडा उत्तर भारत में शिक्षा के हब के रूप में स्थापित हो गया है। दूसरी तरफ, 17 लाख की आबादी वाले जिला गौतमबुद्ध नगर के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली या दूसरे जिलों की ताकना पड़ता है। विशेषकर कम आय वाले घरों से आने वाले विद्यार्थियों को यदि विज्ञान में परास्नातक करना हो तो जिले से बाहर ही दाखिला लेना पड़ता है।
जिले में सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त तीन स्नातक और तीन परास्नातक कॉलेज हैं। जबकि प्रति वर्ष करीब 15 से 20 हजार विद्यार्थी या तो अधिक पैसा खर्च कर निजी कॉलेजों में एडमिशन लेने या फिर जिले से बाहर शिक्षा लेने को विवश हैं। यही नहीं जिले के इकलौते सरकारी विश्वविद्यालय जीबीयू में विज्ञान वर्ग की पांच शाखाओं में परास्नातक का कोर्स है लेकिन दो वर्ष के पाठ्यक्रम के लिए करीब 1.80 लाख रुपये (फीस के साथ हॉस्टल चार्ज भी) खर्च करने पड़ सकते हैं।
वहीं, निजी विश्वविद्यालयों में तो यह आंकड़ा दो वर्ष में करीब ढाई लाख रुपये से चार लाख रुपये तक पहुंच जाता है। जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय या मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एमएससी के लिए दो वर्ष में सात से आठ हजार रुपये में ही की जा सकती है। ऐसे में निम्न और मध्यम आय वर्ग के घरों से आए विद्यार्थी दिल्ली, गाजियाबाद, बुलंदशहर जैसे शहरों के अलावा कोई रास्ता नहीं है। विद्यार्थियों को 50-50 किलोमीटर दूर दो से तीन घंटे यात्रा कर शिक्षण के लिए जाना पड़ता है।
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जिले में सरकारी या सहायता प्राप्त स्नातक और परास्नातक कॉलेज
1. कुमारी मायावती राजकीय महिला महाविद्यालय बादलपुर, 2. बादलपुर पीजी कॉलेज, 3. नोएडा पीजी कॉलेज, 4. मिहिर भोज पीजी कॉलेज दादरी। यह चारों कॉलेज सीसीएसयू से संबद्ध हैं। वहीं, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय कासना में टेक्निकल और नॉन टेक्निकल कोर्स की पढ़ाई होती है।
जेवर, रबूपुरा, दनकौर, बिलासपुर में नहीं है डिग्री कॉलेज
नोएडा और दादरी में स्नातक और परास्नातक कॉलेज भी हैं लेकिन जेवर, रबूपुरा, दनकौर, बिलासपुर में एक भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज नहीं हैं। दनकौर और बिलासपुर में निजी स्नातक कॉलेज जरूर हैं लेकिन कई कोर्स न होने के के चलते विद्यार्थियों को बुलंदशहर या गाजियाबाद जाना पड़ता है।
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जिले में सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त तीन स्नातक और तीन परास्नातक कॉलेज हैं। जबकि प्रति वर्ष करीब 15 से 20 हजार विद्यार्थी या तो अधिक पैसा खर्च कर निजी कॉलेजों में एडमिशन लेने या फिर जिले से बाहर शिक्षा लेने को विवश हैं। यही नहीं जिले के इकलौते सरकारी विश्वविद्यालय जीबीयू में विज्ञान वर्ग की पांच शाखाओं में परास्नातक का कोर्स है लेकिन दो वर्ष के पाठ्यक्रम के लिए करीब 1.80 लाख रुपये (फीस के साथ हॉस्टल चार्ज भी) खर्च करने पड़ सकते हैं।
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वहीं, निजी विश्वविद्यालयों में तो यह आंकड़ा दो वर्ष में करीब ढाई लाख रुपये से चार लाख रुपये तक पहुंच जाता है। जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय या मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में एमएससी के लिए दो वर्ष में सात से आठ हजार रुपये में ही की जा सकती है। ऐसे में निम्न और मध्यम आय वर्ग के घरों से आए विद्यार्थी दिल्ली, गाजियाबाद, बुलंदशहर जैसे शहरों के अलावा कोई रास्ता नहीं है। विद्यार्थियों को 50-50 किलोमीटर दूर दो से तीन घंटे यात्रा कर शिक्षण के लिए जाना पड़ता है।
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जिले में सरकारी या सहायता प्राप्त स्नातक और परास्नातक कॉलेज
1. कुमारी मायावती राजकीय महिला महाविद्यालय बादलपुर, 2. बादलपुर पीजी कॉलेज, 3. नोएडा पीजी कॉलेज, 4. मिहिर भोज पीजी कॉलेज दादरी। यह चारों कॉलेज सीसीएसयू से संबद्ध हैं। वहीं, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय कासना में टेक्निकल और नॉन टेक्निकल कोर्स की पढ़ाई होती है।
जेवर, रबूपुरा, दनकौर, बिलासपुर में नहीं है डिग्री कॉलेज
नोएडा और दादरी में स्नातक और परास्नातक कॉलेज भी हैं लेकिन जेवर, रबूपुरा, दनकौर, बिलासपुर में एक भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज नहीं हैं। दनकौर और बिलासपुर में निजी स्नातक कॉलेज जरूर हैं लेकिन कई कोर्स न होने के के चलते विद्यार्थियों को बुलंदशहर या गाजियाबाद जाना पड़ता है।