किस्सा राजनीति का : महज पांच हजार रुपये में हो गया था सम्मेलन, नेहरू भी हुए थे शामिल
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राजनीति अब पेचीदा ही नहीं महंगी भी हो गई है। वर्तमान समय में एक-एक जनसभा में कई-कई लाख रुपये खर्च होते हैं, लेकिन गाजियाबाद में तीन दिन का सम्मेलन महज 5714 रुपये में हुआ। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री शामिल हुए थे।
बात दूसरे लोकसभा चुनाव के बाद वर्ष 1959 की है। देश में कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर जवाहर लाल नेहरू काबिज थे। गाजियाबाद के सबसे पहले विधायक सरदार तेजा सिंह के दामाद गुरुदेव सिंह मल्होत्रा उन दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि मई 1959 में कांग्रेस का तीन दिवसीय सम्मेलन होना तय हुआ था।
तब गाजियाबाद मेरठ जिले की एक तहसील हुआ करता था। इस सम्मेलन की कमान स्थानीय विधायक तेजा सिंह को सौंपी गई। घंटाघर रामलीला मैदान में हुए सम्मेलन की तैयारी के लिए कई दिन पहले बड़े नेताओं की टीम गाजियाबाद पहुंच गई थी।
नेताओं ने सम्मेलन के लिए चंदा इकट्ठा किया। एक रुपये से लेकर 151 रुपये का चंदा इकट्ठा किया गया और बाकायदा इसकी एक बुकलेट प्रकाशित कराई गई। सबसे ज्यादा 151 रुपये का चंदा बाबू बनारसी दास की ओर से दिया गया।
तीन दिन के सम्मेलन के लिए लगाए गए पंडाल पर महज 687 रुपये खर्च हुए जबकि भोजन पर 455 रुपये खर्च हुए। वर्तमान दौर में एक नेता के खाने का बिल ही हजारों में होता है। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, ऑल इंडिया कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष इंदिरा गांधी समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए थे।
सम्मेलन की सफलता के बाद उन्होंने कांग्रेस की स्थानीय कमेटी को संदेश पत्र भी भेजे थे। तत्कालीन रेल मंत्री जगजीवन राम, तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई, गुलजारी लाल नंदा समेत कई केंद्रीय मंत्रियों के संदेश मिले थे।