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दिल्ली के दंगल में भाजपा की इकलौती पार्टी, किसी और राजनीतिक दल से नहीं है मुकाबला: तिवारी
Sun, 05 May 2019 06:07 AM IST
देव कश्यप
विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली
विजय सिंघल, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 05 May 2019 06:07 AM IST
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manoj tiwari
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दिल्ली के दंगल में भाजपा ही एक मात्र पार्टी है। कांग्रेस और आप से उसका कोई मुकाबला नहीं है। कांग्रेस व आप के बीच 21-19 प्रतिशत वोट की लड़ाई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने अमर उजाला के दिल्ली ब्यूरो चीफ विजय सिंघल से बात करते हुए इस बात पर दुख जताया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस उम्र में शीला दीक्षित को सजा दी है और उन पर हार का ठीकरा फूटने वाला है। रही बात आप की, आप एक डूबता जहाज है, जिससे विधायक दूर होते जा रहे हैं।
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दिल्ली में भाजपा का किस पार्टी से मुकाबला है ?
भाजपा का किसी भी पार्टी से मुकाबला नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सातों सांसदों के कामकाज से जनता खुश है। हम पिछली बार से भी ज्यादा वोटों से जीतेंगे। रही बात कांग्रेस और आप की तो वे दोनों 21-19 प्रतिशत वोटों के बीच लड़ रहे हैं।
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यदि भाजपा की जीत पक्की थी तो क्या कारण है आपको दो प्रत्याशी बदलने पड़े?
पार्टी तय करती है कि किस नेता से क्या काम लेना है। पार्टी सांसद महेश गिरी को सांसद से भी बड़ी जिम्मेदारी देना चाहती है। वहीं उदित राज को भी जिम्मेदारी मिलनी थी लेकिन उन्होंने जल्दबाजी कर दी। उन्हें पार्टी ने बहुत प्यार दिया है वह जल्द ही इसे महसूस भी करेंगे।
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आपको नहीं लगता कि कांग्रेस-आप के बीच गठबंधन न होने से भाजपा को राहत मिली है, वरना मुकाबला कड़ा होता?
ऐसा नहीं है, यदि गठबंधन हो जाता तो कांग्रेस पूरी तरह से खत्म हो जाती। अभी भी कांग्रेस के पूर्व विधायक व नेता भाजपा से जुड़ रहे हैं और गठबंधन होने से ज्यादा संख्या में कांग्रेस के नेता भाजपा से जुड़ जाते।
पूर्व मंत्री अरविंदर सिंह लवली व अन्य नेता भाजपा में आए थे पर कुछ ही अरसे में उनका मोह भंग हो गया, ऐसा क्यों?
लवली की बात मैं नहीं करना चाहता, उनका मामला अलग था।
भाजपा पर आरोप लग रहे हैं कि विधायकों को खरीदा जा रहा है?
खरीद-फरोख्त वहां होती है जहां सरकार बनाने की जल्दी होती है। भाजपा दिल्ली में कहां सरकार बनाने जा रही है। भाजपा खरीद-फरोख्त के शब्द से अनजान है। कांग्रेस ने ही हमेशा से विधायकों को खरीद कर सरकार बनाई है।
क्या आप समझते हैं कि दिल्ली में भाजपा के नेताओं की अंदरूनी झगड़े में पार्टी सातों सीटें जीतेगी?
भाजपा में कहीं भी अंदरूनी नाराजगी नहीं है। विजय गोयल से मेरा झगड़ा बताया गया, यह सबके सामने है कि वह मेरा कितना सम्मान व कितनी तारीफ करते हैं। यह भ्रम कुछ लोगों ने फैलाया हुआ था। यही कारण है कि भाजपा दिल्ली में 22 वर्ष से सत्ता में नहीं है। अब हम लोग सावधान हो गए हैं और भ्रम भी दूर हो गए हैं।
कांग्रेस ने अपने सभी हैवीवेट नेताओं को मैदान में उतारा है, क्या वे मुकाबले में नहीं है?
कांग्रेस के प्रत्याशी हैवीवेट नहीं बल्कि पिटे हुए नेता हैं। जनता ने इन सभी को पहले ही नकार दिया था।
दिल्ली में आप की सरकार है और उसके 66 विधायक हैं, फिर भी भाजपा उसे मुकाबले से बाहर कैसे बता सकती है?
यह ठीक है कि आप के विधायकों की संख्या ज्यादा हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के व्यवहार के कारण अधिकांश विधायक पार्टी छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। मुख्यमंत्री ने हर समुदाय चाहे वे पूर्वांचली हो या फिर दलित या मुस्लिम के प्रति अभद्र व्यवहार किया है। विधायक अपने समुदाय में जाने से डर रहे हैं ऐसे में वे पार्टी छोड़ रहे हैं और पार्टी खत्म हो रही है।
लवली की बात मैं नहीं करना चाहता, उनका मामला अलग था।
भाजपा पर आरोप लग रहे हैं कि विधायकों को खरीदा जा रहा है?
खरीद-फरोख्त वहां होती है जहां सरकार बनाने की जल्दी होती है। भाजपा दिल्ली में कहां सरकार बनाने जा रही है। भाजपा खरीद-फरोख्त के शब्द से अनजान है। कांग्रेस ने ही हमेशा से विधायकों को खरीद कर सरकार बनाई है।
क्या आप समझते हैं कि दिल्ली में भाजपा के नेताओं की अंदरूनी झगड़े में पार्टी सातों सीटें जीतेगी?
भाजपा में कहीं भी अंदरूनी नाराजगी नहीं है। विजय गोयल से मेरा झगड़ा बताया गया, यह सबके सामने है कि वह मेरा कितना सम्मान व कितनी तारीफ करते हैं। यह भ्रम कुछ लोगों ने फैलाया हुआ था। यही कारण है कि भाजपा दिल्ली में 22 वर्ष से सत्ता में नहीं है। अब हम लोग सावधान हो गए हैं और भ्रम भी दूर हो गए हैं।
कांग्रेस ने अपने सभी हैवीवेट नेताओं को मैदान में उतारा है, क्या वे मुकाबले में नहीं है?
कांग्रेस के प्रत्याशी हैवीवेट नहीं बल्कि पिटे हुए नेता हैं। जनता ने इन सभी को पहले ही नकार दिया था।
दिल्ली में आप की सरकार है और उसके 66 विधायक हैं, फिर भी भाजपा उसे मुकाबले से बाहर कैसे बता सकती है?
यह ठीक है कि आप के विधायकों की संख्या ज्यादा हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के व्यवहार के कारण अधिकांश विधायक पार्टी छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। मुख्यमंत्री ने हर समुदाय चाहे वे पूर्वांचली हो या फिर दलित या मुस्लिम के प्रति अभद्र व्यवहार किया है। विधायक अपने समुदाय में जाने से डर रहे हैं ऐसे में वे पार्टी छोड़ रहे हैं और पार्टी खत्म हो रही है।