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दिल्ली की मंडियों में लॉकडाउन का कोई असर नहीं, मजदूरों में महामारी का डर

Thu, 02 Apr 2020 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 02 Apr 2020 05:42 AM IST
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Lockdown in Delhi's mandis has no effect 
आजादपुर मंडी - फोटो : अमर उजाला

लॉकडाउन का असर दिल्ली की मंडियों में नहीं दिख रहा है। सामाजिक दूरी बनाए बिना लोग खरीदारी कर रहे हैं। इस तरह की लापरवाही का खामियाजा लोगों को उठाना पड़ सकता है। आजादपुर फ्रूट एंड वेजिटेबल वर्कर्स यूनियन के महासचिव हरवीर सिंह का कहना है कि मंडी में एक भी मरीज कोरोना का शिकार हुआ तो महामारी को कोई नहीं रोक सकता। बेहतर साफ-सफाई नहीं होने की वजह से भी बीमारी का खतरा है। मजदूर भी महामारी से डरे हुए हैं।

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उधर, कुछ व्यापारियों का संगठन सब्जी मंडी को बंद करने के पक्ष में भी दलील दे रहे हैं। आजादपुर मंडी के सदस्य व कारोबारी अनिल मल्होत्रा का कहना है कि मंडी में काम करने वाले मजदूर व आढ़ती खौफ में है। लोगों में भय है कि अगर कोरोना वायरस का संक्रमण मंडी में फैल गया तो क्या होगा। सप्ताह में 3 दिन ही खोलने की भी मांग की है। व्यापारी मंडी प्रशासन पर भी कोरोना वायरस के बचाव के लिए इंतजाम नहीं करने का आरोप मढ़ रहे है। 
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सब्जियों की आवक में कमी नहीं, पर खरीदार गायब 
हालांकि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए ग्राहक बाजार से नदारद हैं। हरी सब्जियों की खरीदारी में जहां व्यापारी 50 प्रतिशत की गिरावट बता रहे हैं तो वहीं, नवरात्र के दिनों में फलों की खरीदारी में 80 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। 
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दरअसल लॉकडाउन के एलान के बाद लोगों ने जमकर खाद्य पदार्थों की खरीदारी कर ली है। इसमें मुख्य रूप से दाल, राजमा, काला चना, सोयाबीन, सूजी, दलिया समेत कई खाद्य पदार्थ शामिल हैं। 

अधिकतर लोग आलू-प्याज से ही काम चला रहे हैं। मंडियों में मांग के अनुसार सब्जियों की आवक में कमी नहीं है। हालांकि खरीदार कम हैं और थोक व्यापार मंदा है। फिर भी खुदरा बाजार में सब्जियां काफी महंगी बिक रही है।


आजादपुर मंडी के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र शर्मा बताते है कि सब्जियों की आवक मांग से ज्यादा है। उन्होंने बताया कि रेहड़ी-पटड़ी वालों को सब्जियां लगाने की इजाजत नहीं है। इस वजह से मांग में काफी कमी है। हरी सब्जियों की मांग आधी भी नहीं है। उन्होंने बताया कि पहले जहां प्रतिदिन हरी सब्जियों की 70 से अधिक ट्रक आती थी, वह घटकर 20 तक पहुंच गई है। इसी तरह आलू औसतन प्रतिदिन 80 ट्रक आता था। इन दिनों मांग नहीं होने की वजह से 20-25 ट्रक ही आ रहा है।  

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