पूर्व रेलमंत्री की हत्या के मामले में 39 साल बाद आया फैसला
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39 साल से चल रही लंबी सुनवाई के बाद पूर्व रेल मंत्र ललित नारायण मिश्रा हत्या मामले में सोमवार को फैसला आ गया। दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने मामले में चारों हत्यारोपियों को दोषी करार दिया।
हालांकि चारों आरोपियों, गोपाल जी, रंजन द्विवेदी, संतोषानंद अवधूत और सुदेवानंद अवधूत को सजा 15 दिसंबर को बहस के बाद सुनाई जाएगी। पिछली सुनवाई में जिला न्यायाधीश विनोद गोयल ने फैसले के लिए आज का दिन निर्धारित किया था।
गौरतलब है कि जनवरी 1975 में तत्कालीन रेलमंत्री एलएन मिश्रा बिहार के समस्तीपुर में घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। आरोप है कि ये विस्फोट हिंदूपंथी संगठन आनंद मार्ग के एक नेता की रिहाई के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए कराया गया था। जिसमें आनंद मार्ग के चार आनुयायियों पर दोष सिद्ध हुआ है।
200 से अधिक गवाहों से हुई पूछताछ
घटना की आरंभिक सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 1979 में मामला दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। तब 1981 में ही आरोपियों पर आरोप तय कर दिए थे। लेकिन बाद में न्यायिक प्रक्रिया अटक गई थी। इसके बिनाह पर आरोपी मामले को निरस्त करने की भी मांग कर रहे थे।
लेकिन सितंबर 2012 में अदालत ने फिर सख्त रवैया अपनाते हुए मामले की नये सिरे से सुनवाई शुरू की। इस हत्याकांड में अब तक 200 से अधिक गवाहों से पूछताछ, अभियोजन पक्ष के 161 और बचाव पक्ष के 40 से अधिक गवाहों के बयान सुने जा चुके हैं।
इतनी लंबी सुनवाई के बाद सोमवार को आखिरकार आरोपियों को दोषी ठहरा गया और उन्हें सजा सुनाने का दिन निश्चित कर दिया। गौरतलब है कि मामले में आरोपी वकील रंजन द्विवेदी की मौत हो चुकी है।