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Delhi NCR News: मां और छोटे भाई के हत्यारे को आजीवन कारावास
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2019 की वारदात पर कोर्ट ने सुनाया, बिंदापुर पुलिस थाने का है मामला
उत्तम नगर के राजापुरी में रहने वाले सुनील भाई राजेंद्र और मां लता को मारा था
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। द्वारका कोर्ट ने 2019 में अपने ही छोटे भाई और मां की हत्या करने के दोषी सुनील अरोड़ा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रधान जिला एंव सत्र न्यायाधीश पवन कुमार जैन ने दोषी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माने अदा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त जेल की सजा होगी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला दुर्लभ श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। इस बात को खुद अतिरिक्त लोक अभियोजक ने भी निष्पक्ष रूप से स्वीकार किया। अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में मौत की सजा तभी दी जाती है, जब अपराध असाधारण रूप से जघन्य हो।
सजा के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी के लिए नरमी बरतने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि अभियोजन पक्ष हत्या के पीछे का ठोस मकसद साबित नहीं कर पाया और यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि घटना की शुरुआत कैसे हुई। हालांकि अदालत ने सभी दलीलों और रिकॉर्ड का गहन अध्ययन करने के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 354(3) के तहत विशेष कारण केवल मृत्युदंड के मामलों में आवश्यक होता है। चूंकि यह मामला उस श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उम्रकैद की सजा ही उचित है। अदालत को यह भी बताया कि मृतक मां और छोटे भाई का कोई आश्रित नहीं है, इसलिए इस मामले में किसी तरह का मुआवजा नहीं दिया गया। तथ्यों के मुताबिक, मामला बिंदापुर पुलिस थाने का है। उत्तम नगर के राजा पुरी में रहने वाले सुनील अरोड़ा ने 23 अप्रैल, 2019 को छोटे भाई राजेंद्र अरोड़ा उर्फ राजू और मां लता अरोड़ा के साथ झगड़े के बाद उन पर जानलेवा हमला किया। जख्मी राजू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि, मां ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा।
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उत्तम नगर के राजापुरी में रहने वाले सुनील भाई राजेंद्र और मां लता को मारा था
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। द्वारका कोर्ट ने 2019 में अपने ही छोटे भाई और मां की हत्या करने के दोषी सुनील अरोड़ा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। प्रधान जिला एंव सत्र न्यायाधीश पवन कुमार जैन ने दोषी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 के तहत दोषी ठहराते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माने अदा करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि जुर्माना न देने पर एक साल की अतिरिक्त जेल की सजा होगी। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला दुर्लभ श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता। इस बात को खुद अतिरिक्त लोक अभियोजक ने भी निष्पक्ष रूप से स्वीकार किया। अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में मौत की सजा तभी दी जाती है, जब अपराध असाधारण रूप से जघन्य हो।
सजा के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने आरोपी के लिए नरमी बरतने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि अभियोजन पक्ष हत्या के पीछे का ठोस मकसद साबित नहीं कर पाया और यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि घटना की शुरुआत कैसे हुई। हालांकि अदालत ने सभी दलीलों और रिकॉर्ड का गहन अध्ययन करने के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 354(3) के तहत विशेष कारण केवल मृत्युदंड के मामलों में आवश्यक होता है। चूंकि यह मामला उस श्रेणी में नहीं आता, इसलिए उम्रकैद की सजा ही उचित है। अदालत को यह भी बताया कि मृतक मां और छोटे भाई का कोई आश्रित नहीं है, इसलिए इस मामले में किसी तरह का मुआवजा नहीं दिया गया। तथ्यों के मुताबिक, मामला बिंदापुर पुलिस थाने का है। उत्तम नगर के राजा पुरी में रहने वाले सुनील अरोड़ा ने 23 अप्रैल, 2019 को छोटे भाई राजेंद्र अरोड़ा उर्फ राजू और मां लता अरोड़ा के साथ झगड़े के बाद उन पर जानलेवा हमला किया। जख्मी राजू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि, मां ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा।
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