'बाढ़ के लिए केजरीवाल जिम्मेदार': एलजी ने सीएम पर बोला हमला, कहा- दो साल से नहीं हुई एपेक्स कमेटी की बैठक
उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री दिल्ली में आई बाढ़ के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि वे खुद इसके लिए दोषी हैं।
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राजधानी में बाढ़ से निपटने लायक बुनियादी ढांचे को तैयार करने के लिए दो साल से एपेक्स कमेटी की बैठक ही नहीं हुई। इस कारण बिना रणनीति तैयार किए राजस्व विभाग बाढ़ रोकने में जुटा हुआ है। इसे लेकर उपराज्यपाल कार्यालय ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है।
उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके मंत्री दिल्ली में आई बाढ़ के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, जबकि वे खुद इसके लिए दोषी हैं। दिल्ली में बाढ़ नियंत्रण और बचाव के लिए एपेक्स कमेटी की बैठक होनी चाहिए। यह बैठक जून के अंत तक हर हाल में हो जानी चाहिए, लेकिन मुख्यमंत्री ने दो साल से बैठक ही नहीं बुलाई। बिना बैठक के ही राजस्व विभाग की एक फाइल आगे बढ़ा दी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली इस हाई पावर कमेटी में दिल्ली सरकार के सभी मंत्री, सांसद, चार विधायक, मुख्य सचिव, पुलिस आयुक्त, डीडीए के उपाध्यक्ष, एमसीडी कमिश्नर, एनडीएमसी के चेयरमैन, सीईओ-डीजेबी जीओसी, भारतीय सेना, केंद्र सरकार के अधिकारी सहित अन्य शामिल होते हैं।
ये कमेटी बाढ़ के खतरे व अन्य का आंकलन कर तैयारियां करती हैं। मंडलायुक्त ने जून में मुख्यमंत्री से सुझाव देने का अनुरोध किया। साथ ही, बैठक के लिए समय मांगा। यह फाइल राजस्व मंत्री आतिशी के माध्यम से सीएम को सौंपी गई, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस फाइल को देखा तक नहीं। चार दिनों तक फाइल को रोकने के बाद मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री की इच्छा है कि राजस्व मंत्री बैठक बुलाएं। 30 जून को बिना मुख्य सचिव व अन्य अधिकारियों के मंत्री ने बैठक बुलाई। बाद में डीएम कार्यालय ने 5 और 6 जुलाई को छोटी बैठक कर मुख्य हितधारकों को विश्वास में लेकर अनौपचारिक बाढ़ नियंत्रण आदेश जारी किया। बिना बैठक की जा रही तैयारियों के कारण दिल्ली में पानी भर गया, जबकि हर स्तर के आधार पर चेतावनी जारी की जानी चाहिए थी।
. खतरे के स्तर की निगरानी और चेतावनी जारी करना
. हथिनी कुंड से यमुना में एक लाख क्यूसेक पानी और नजफगढ़ ड्रेन में 35 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने पर पहली चेतावनी जारी करना
. हथिनी कुंड से यमुना में 3 लाख क्यूसेक और नजफगढ़ ड्रेन में 70 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने पर दूसरी चेतावनी जारी करना
. हथिनी कुंड से यमुना में 5 लाख क्यूसेक और नजफगढ़ ड्रेन में 1 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने पर तीसरी चेतावनी जारी करना
. सेना से सहायता की मांग करना
. नियामकों, बांधों और निचले क्षेत्रों जैसे संवेदनशील बिंदुओं की सुरक्षा करना