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Delhi: दूरसंचार क्षेत्र के लिए बढ़ाई जाएंगी सहूलियतें, एलजी ने राइट ऑफ वे नीति को दी हरी झंडी

Fri, 23 Dec 2022 04:21 AM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 23 Dec 2022 04:21 AM IST
सार

पड़ोसी राज्यों सहित कई राज्यों में नीति के अधिसूचित किए जाने के बाद भी फाइल दिल्ली सरकर के पास 2020 से अटकी हुई थी। इस नीति को बहुत पहले ही अधिसूचित किया जाना चाहिए था। इससे दूरसंचार सेवाएं बेहतर होने के साथ ही कई और लाभ हो सकते थे।

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Lieutenant Governor of Delhi gave green signal to right of way policy
वीके सक्सेना, उपराज्यपाल दिल्ली - फोटो : social media

विस्तार

डिजिटलाइजेशन के दौर में 5जी की तरफ बढ़ते कदम, जी-20 शिखर सम्मेलन और पहले से ही 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अधिसूचित राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) नीति को दिल्ली के उपराज्यपाल ने गुरुवार को हरी झंडी दे दी है। जल्द ही अधिसूचना जारी किए जाने की उम्मीद है।

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इससे भूमिगत और एलिवेटेड हिस्से में दूरसंचार प्रणाली से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर की राह में मुश्किलें नहीं आएंगी। साथ ही आधुनिक दूरसंचार सेवाओं के लिए सहूलियतें बढ़ जाएंगी। दिल्ली के मुख्य सचिव की तरफ से इस मामले में भेजी गई फाइल पर एलजी ने भारतीय टेलीग्राफ नियम-2016 के अनुपालन और राष्ट्रीय प्रसारण मिशन के तहत इस नीति को स्वीकृति दे दी।  
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सूत्रों के मुताबिक पड़ोसी राज्यों सहित कई राज्यों में नीति के अधिसूचित किए जाने के बाद भी फाइल दिल्ली सरकर के पास 2020 से अटकी हुई थी। इस नीति को बहुत पहले ही अधिसूचित किया जाना चाहिए था। इससे दूरसंचार सेवाएं बेहतर होने के साथ ही कई और लाभ हो सकते थे। सूत्रों का कहना है कि 2016 में भारत सरकार द्वारा भारतीय टेलीग्राफ नियमों को अधिसूचित करने के बाद केजरीवाल सरकार शासन इसकी अवहेलना कर रही थी। इस मामले के अंत में एक मसौदा नीति तैयार करने का जनवरी, 2020 को फैसला लिया गया। इस नीति के लागू नहीं होने की वजह से स्थानीय निकायों को दूरसंचार ऑपरेटरों से उचित लाभ नहीं मिल सका।
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सिसोदिया ने टिप्पणी के साथ वापस भेज  दी थी फाइल
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इस नीति को अधिसूचित करने संबंधी फाइल शहरी विकास को टिप्पणी के साथ वापस भेज दी थी। एलजी सूत्रों के मुताबिक सितंबर, 2022 में फिर से फाइल उनके सामने रखे जाने पर सिसोदिया ने फिर इसे लालफीताशाही में उलझाने का सहारा लेते हुए दोबारा जांच के लिए विधि विभाग के पास फाइल भेज दिया। कानून विभाग द्वारा विधिवत जांच के बाद कानून मंत्री कैलाश गहलोत के माध्यम से सिसोदिया एक नवंबर को बगैर कोई कारण बताए दोबारा शहरी विकास सचिव को भेज दिया। 5जी की दिशा में बढ़ते कदम और जरूरतों के साथ साथ जी-20 शिखर सम्मेलन के लिहाज से मुख्य सचिव ने सीधे एलजी के समक्ष यह फाइल रखी। दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपनी नीतियों को अधिसूचित कर दिया था, इसलिए यह फाइल सीधे एलजी के समक्ष रखी गई।

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