LG की रिपोर्ट में दिल्ली चुनाव पर फैसला!
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राजधानी में सत्ता के लिए जारी संघर्ष जल्द ही खत्म होने की उम्मीद है। दिल्ली में पिछले छह महीने से लागू राष्ट्रपति शासन और सरकार बनने की संभावनाओं पर उपराज्यपाल की ओर से भेजी जाने वाली रिपोर्ट में इस बात का फैसला होने वाला है।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में चल रहे राजनीतिक संकट पर उपराज्यपाल की ये रिपोर्ट बहुत जल्दी राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के सामने पेश होने वाली है। चुनावों के लिए अभियान छेड़ने वाले आम आदमी पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 9 सितंबर को सुनवाई होने है इसके पहले ही ये रिपोर्ट आ जाएगी।
दिल्ली सरकार के सूत्रों के अनुसार, उपराज्यपाल की रिपोर्ट में दो विकल्प होंगे। पहला ये कि दिल्ली की सबसे बड़ी पार्टी यानी भाजपा को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए और दूसरा ये कि फिर से चुनाव कराए जाएं।
हालांकि भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत न होने के कारण यह माना जा रहा है कि उपराज्यपाल की रिपोर्ट दिल्ली में दोबारा चुनाव कराने पर ही जोर देगी।
...तो मोदी कैबिनेट लेगी आखिरी फैसला?
एचटी के अनुसार, उपराज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी दिल्ली के भविष्य पर फैसला लेंगे। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति के कहने पर उपराज्यपाल भाजपा को सरकार बनाने के लिए बुला सकते हैं लेकिन उनके पास स्पष्ट बहुमत न होने के कारण भाजपा सरकार बनाने से मना कर सकती है।
ऐसे में एक मात्र विकल्प बचता है कि राजधानी में दोबारा चुनाव हों, जोकि जनवरी 2015 तक संभव हैं।
सूत्रों के अनुसार उपराज्यपाल की ओर से भेजी जाने वाली ये रिपोर्ट गृहमंत्री राजनाथ सिंह के पास भेजी जाएगी। जहां से इसे केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अगर कैबिनेट दिल्ली में अल्पमत की सरकार बनाने के लिए राजी हो जाती है तो उपराज्यपाल, दिल्ली भाजपा अध्यक्ष सतीश उपाध्याय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे।
बता दें कि दिल्ली में इस साल 14 फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस्तीफा देने के कारण राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। केजरीवाल ने अपने इस्तीफे के पीछे वजह लोकपाल बिल में कांग्रेस का समर्थन न मिलना बताया था जबकि उनके विरोधी मानते हैं कि केजरीवाल ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दिया था।
केजरीवाल ने वापस नहीं ली अपनी चिट्ठी
हालांकि अगर भाजपा सरकार बनाने से मना करती है तो उपराज्यपाल राष्ट्रपति से विधानसभा भंग करने को कहेंगे। दिल्ली में भाजपा और अकाली गठबंधन के पास वर्तमान में 29 विधायक हैं। जबकि तीन विधायकों, डॉ. हर्षवर्धन, रमेश बिधूड़ी और प्रवेश वर्मा ने सांसद चुने जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।
आम आदमी पार्टी के पास कुल 27 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 8 विधायक हैं। जबकि तीन विधायक निर्दलीय हैं।
दिलचस्प बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट में विधानसभा भंग करने की याचिका दायर करने वाली आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में करारी हार मिलने के बाद 20 मई को उपराज्यपाल को चिट्ठी लिखकर ये मांग की थी कि विधानसभा भंग न की जाए। केजरीवाल ने लिखा था कि वे दिल्ली में दोबारा सरकार बनाने लिए जनता की राय लेंगे।
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केजरीवाल ने अब तक अपना वो पत्र वापस नहीं लिया है।