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Delhi: एलजी ने दी दिल्ली शिकायत निवारण नियम के मसौदे को मंजूरी, दस साल से लंबित है राज्य खाद्य आयोग का गठन

Mon, 26 Jun 2023 11:52 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 26 Jun 2023 11:52 PM IST
सार

उपराज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फाइल यह लिखकर कि फाइल पर अनजाने में हस्ताक्षर कर भेज दिया था। इसमें बदलाव की जरूरत है, इसमें राजनीति की।

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LG approves draft of Delhi Grievance Redressal Rules
सीएम केजरीवाल और उपराज्यपाल वीके सक्सेना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी दिल्ली के लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) और एफपीएस से संबंधित शिकायतों के समाधान के लिए दस साल से लंबित दिल्ली शिकायत निवारण नियमों के मसौदे को उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मंजूरी दे दी। इस देरी के लिए उन्होंने दिल्ली सरकार पर निशाना साधते हुए संवेदनहीन बताया। देश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 (एनएफएसए) लागू हुए दस साल हो गए हैं। इसमें पारदर्शिता के लिए शिकायत निवारण तंत्र तैयार किया जाना है। 

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इसमें देरी होने पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ने वर्ष 2017 में वर्ष के अंत तक इसे लागू करने को कहा था। फिर भी इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई, जिस कारण केंद्र सरकार ने चेतावनी दी कि 30 जून तक तंत्र और आयोग का गठन किया जाए, नहीं तो केंद्रीय सहायता रोक दी जाएगी। इसके बाद दिल्ली सरकार ने उपराज्यपाल को फाइल भेजी। इस मंजूरी के बाद दिल्ली की गरीब जनता को मिल रहे सस्ते राशन की सुविधा जारी रहेगी।

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इस पर करना है काम

नया तंत्र उचित मूल्य की दुकानें न खुलने, निर्दिष्ट खाद्य सामग्री (एसएफए) जारी न करने, नाप-तोल में गड़बड़ी और अधिक कीमत वसूलने जैसी शिकायतों का निवारण करेगा।

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बनाया गया राजनीतिक मुद्दा

उपराज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने फाइल यह लिखकर कि फाइल पर अनजाने में हस्ताक्षर कर भेज दिया था। इसमें बदलाव की जरूरत है, इसमें राजनीति की। फाइल लेने के बाद इसे वापस भेजने में छह साल लगा दिए। केंद्र की चेतावनी के बाद इस फाइल को मंजूरी के लिए भेजा।

 

ऐसा कहा गया कि फाइल तत्कालीन उपराज्यपाल को मंजूरी के लिए दी थी और इसे मुख्यमंत्री ने वापस ले लिया। इस पर उपराज्यपाल कार्यालय ने कहा कि यह कहना गलत नहीं होगा कि सरकार पूरी तरह से न्यायालयों के साथ-साथ दिल्ली के गरीब निवासियों की भी अवमानना करती रही है। अभी कुछ दिन पहले ही टीपीडीएस और एफपीएस के सोशल ऑडिट के मामले में भी यही परिस्थितियां उपराज्यपाल के सामने आई थीं। दिल्ली में यदि नियमों और राज्य आयोग के गठन की अधिसूचना लागू नहीं होता तो दिल्ली के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ता।

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