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Delhi NCR News: दिल्ली में कुष्ठ रोग घोषित होगा अधिसूचित बीमारी, हर केस की सूचना अनिवार्य
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- रोग की निगरानी, समय पर इलाज और प्रसार रोकने के लिए सरकार का बड़ा फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने कुष्ठ रोग को दिल्ली महामारी रोग अधिनियम के तहत अधिसूचित बीमारी घोषित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में उठाए गए इस कदम का उद्देश्य रोग के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। इसके लागू होने के बाद दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों—क्लीनिक, अस्पताल और चिकित्सकों—को कुष्ठ रोग के हर नए मामले की सूचना जिला कुष्ठ रोग अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। इससे मामलों की सटीक निगरानी, शीघ्र पहचान और मल्टी ड्रग थेरेपी के जरिए प्रभावी इलाज संभव हो सकेगा। यह उपचार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध रहेगा।
44 फीसदी से अधिक मामले निजी स्वास्थ्य केंद्रों में होते हैं दर्ज-
एक अध्ययन के अनुसार देश में 44 प्रतिशत से अधिक कुष्ठ रोग के मरीज निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराते हैं, जिनकी जानकारी अक्सर राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम तक नहीं पहुंचती। इससे संक्रमण फैलने और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का खतरा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस रोग को अनिवार्य सूचना वाली सूची में शामिल करने की सिफारिश कर चुका है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। अधिसूचना से छिपे मामलों की पहचान होगी और रोग के प्रसार पर रोक लगेगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसके संचरण को समाप्त करना है। इसके साथ ही संपर्क ट्रेसिंग और पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) जैसे उपायों को भी मजबूत किया जाएगा। यह पहल न केवल बीमारी पर नियंत्रण करेगी, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक भेदभाव को कम करने और मरीजों को सम्मानजनक उपचार दिलाने में भी मददगार साबित होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने कुष्ठ रोग को दिल्ली महामारी रोग अधिनियम के तहत अधिसूचित बीमारी घोषित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में उठाए गए इस कदम का उद्देश्य रोग के प्रसार पर प्रभावी नियंत्रण और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है। प्रस्ताव को मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। इसके लागू होने के बाद दिल्ली, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों—क्लीनिक, अस्पताल और चिकित्सकों—को कुष्ठ रोग के हर नए मामले की सूचना जिला कुष्ठ रोग अधिकारी को देना अनिवार्य होगा। इससे मामलों की सटीक निगरानी, शीघ्र पहचान और मल्टी ड्रग थेरेपी के जरिए प्रभावी इलाज संभव हो सकेगा। यह उपचार सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध रहेगा।
44 फीसदी से अधिक मामले निजी स्वास्थ्य केंद्रों में होते हैं दर्ज-
एक अध्ययन के अनुसार देश में 44 प्रतिशत से अधिक कुष्ठ रोग के मरीज निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज कराते हैं, जिनकी जानकारी अक्सर राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम तक नहीं पहुंचती। इससे संक्रमण फैलने और दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने का खतरा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस रोग को अनिवार्य सूचना वाली सूची में शामिल करने की सिफारिश कर चुका है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। अधिसूचना से छिपे मामलों की पहचान होगी और रोग के प्रसार पर रोक लगेगी। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इसके संचरण को समाप्त करना है। इसके साथ ही संपर्क ट्रेसिंग और पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीईपी) जैसे उपायों को भी मजबूत किया जाएगा। यह पहल न केवल बीमारी पर नियंत्रण करेगी, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक भेदभाव को कम करने और मरीजों को सम्मानजनक उपचार दिलाने में भी मददगार साबित होगी।
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