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Delhi NCR News: न्यायाधीशों को पक्षपाती लिखने वाली वकील पर अवमानना के आरोप तय
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- आरोपी अधिवक्ता ने लिंक्ड इन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यायाधीशों और न्यायपालिका के लिए अभद्र भाषा का किया था इस्तेमाल
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वकील संजुक्ता कबासी के खिलाफ आपराधिक अवमानना के आरोप तय कर दिए। उन्हें अदालत में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और लिंक्डइन पर न्यायपालिका के खिलाफ घृणित आरोप लगाने का दोषी माना। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि वकील ने अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाई और न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप किया।
अदालत ने संजुक्ता कबासी द्वारा लिंक्डइन पर पोस्ट किए गए विवादास्पद कंटेंट को आधार बनाया, जिसमें उन्होंने न्यायाधीशों पर पक्षपात और साजिश का आरोप लगाया था। अदालत ने बताया कि कबासी ने एक प्रतिकूल आदेश आने के बाद निराशा में यह कदम उठाया, लेकिन इससे अदालत की साख को नुकसान पहुंचा। लिंक्डइन अकाउंट को डिलीट कर दिया गया था, लेकिन अदालत ने आईपी एड्रेस और मोबाइल डाटा के जरिए इसे कबासी से जोड़ा। जनवरी 2026 में स्वत: संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया गया था और बाद में लिंक्डइन से यूजर डिटेल्स मांगी गईं। पीठ ने स्पष्ट किया कि वकील की निराशा या असहमति को अदालत की आलोचना का बहाना नहीं बनाया जा सकता, खासकर जब आरोप बिना आधार के और अपमानजनक हों।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वकील संजुक्ता कबासी के खिलाफ आपराधिक अवमानना के आरोप तय कर दिए। उन्हें अदालत में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और लिंक्डइन पर न्यायपालिका के खिलाफ घृणित आरोप लगाने का दोषी माना। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि वकील ने अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाई और न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप किया।
अदालत ने संजुक्ता कबासी द्वारा लिंक्डइन पर पोस्ट किए गए विवादास्पद कंटेंट को आधार बनाया, जिसमें उन्होंने न्यायाधीशों पर पक्षपात और साजिश का आरोप लगाया था। अदालत ने बताया कि कबासी ने एक प्रतिकूल आदेश आने के बाद निराशा में यह कदम उठाया, लेकिन इससे अदालत की साख को नुकसान पहुंचा। लिंक्डइन अकाउंट को डिलीट कर दिया गया था, लेकिन अदालत ने आईपी एड्रेस और मोबाइल डाटा के जरिए इसे कबासी से जोड़ा। जनवरी 2026 में स्वत: संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया गया था और बाद में लिंक्डइन से यूजर डिटेल्स मांगी गईं। पीठ ने स्पष्ट किया कि वकील की निराशा या असहमति को अदालत की आलोचना का बहाना नहीं बनाया जा सकता, खासकर जब आरोप बिना आधार के और अपमानजनक हों।
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