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Delhi NCR News: डीयू में कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों ने जाना विधानसभा का इतिहास
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- दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने लॉ सेंटर-2 के छात्रों से किया विधानसभा परिसर में संवाद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने डीयू में कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों को विधानसभा के इतिहास से रूबरू कराया। विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक ढांचे के बारे में जानकारी दी। छात्रों ने अध्यक्ष के साथ विधानसभा सदन का भी भ्रमण किया।
विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा भवन के ऐतिहासिक महत्व को समझाते हुए बताया कि 1912 में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित हुई थी। तब पुराना सचिवालय भवन केंद्रीय विधानसभा के रूप में काम करता था। लुटियंस दिल्ली के तैयार होने से पहले यहीं से देश की विधायी गतिविधियां चलती थीं। उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, मदन मोहन मालवीय और विट्ठलभाई पटेल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान बताए, जिन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा की मजबूत नींव रखी।
1993 में पहली बार दिल्ली में बनी निर्वाचित विधानसभा
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि विधानसभा परिसर करीब 22 एकड़ में फैला है और यह देश के सबसे बड़े विधान परिसरों में से एक है। उन्होंने दिल्ली को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे की जानकारी दी। बालकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर अनुच्छेद 239 (एए) जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत दिल्ली को 70 सदस्यों वाली विधानसभा का दर्जा मिला। उन्होंने बताया कि 1993 में दिल्ली में पहली बार निर्वाचित विधानसभा का गठन हुआ था।
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विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों को मौजूदा आठवीं विधानसभा की वर्तमान संरचना और दिल्ली की विधायी यात्रा के विभिन्न ऐतिहासिक पड़ावों से रूबरू कराया।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने डीयू में कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों को विधानसभा के इतिहास से रूबरू कराया। विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक ढांचे के बारे में जानकारी दी। छात्रों ने अध्यक्ष के साथ विधानसभा सदन का भी भ्रमण किया।
विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा भवन के ऐतिहासिक महत्व को समझाते हुए बताया कि 1912 में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित हुई थी। तब पुराना सचिवालय भवन केंद्रीय विधानसभा के रूप में काम करता था। लुटियंस दिल्ली के तैयार होने से पहले यहीं से देश की विधायी गतिविधियां चलती थीं। उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले, लाला लाजपत राय, मदन मोहन मालवीय और विट्ठलभाई पटेल जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान बताए, जिन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा की मजबूत नींव रखी।
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1993 में पहली बार दिल्ली में बनी निर्वाचित विधानसभा
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि विधानसभा परिसर करीब 22 एकड़ में फैला है और यह देश के सबसे बड़े विधान परिसरों में से एक है। उन्होंने दिल्ली को मिले विशेष संवैधानिक दर्जे की जानकारी दी। बालकृष्णन समिति की सिफारिशों के आधार पर अनुच्छेद 239 (एए) जोड़ा गया, जिसके अंतर्गत दिल्ली को 70 सदस्यों वाली विधानसभा का दर्जा मिला। उन्होंने बताया कि 1993 में दिल्ली में पहली बार निर्वाचित विधानसभा का गठन हुआ था।
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विजेंद्र गुप्ता ने छात्रों को मौजूदा आठवीं विधानसभा की वर्तमान संरचना और दिल्ली की विधायी यात्रा के विभिन्न ऐतिहासिक पड़ावों से रूबरू कराया।