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डीयू के लॉ स्टूडेंट कहीं नहीं कर सकते प्रैक्टिस

Sat, 27 Sep 2014 09:20 PM IST
Updated Sat, 27 Sep 2014 09:20 PM IST
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Law graduates of delhi university not eligible to practise.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन पाना अपने आप में टेढ़ी खीर है। ऐसे में अगर किसी को यहां दाखिला मिल जाए और तीन साल तक पढ़ने के बाद पता चले कि उसकी डिग्री मान्य नहीं है तो उसके दिल पर क्या बितेगी।

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कुछ ऐसा ही हाल दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट्स का हो गया है। जब से उन्हें यह पता चला है कि लॉ की डिग्री लेने के बाद भी वह देश के किसी भी कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं कर सकते। उनकी नींद उड़ी हुई है।
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लंबे संघर्ष के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों को चार वर्षीय पाठ्यक्रम से छुटकारा मिला था। अब इस नए बवाल ने कैंपस में फिर से तैनाव पैदा कर दिया है।

कोई भी लॉ स्टूडेंट नहीं कर सकेगा प्रैक्टिस

Law graduates of delhi university not eligible to practise.

बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने देश के सभी कांउसिल को नोटीफिकेशन जारी कर कहा है कि डीयू से इस साल पास होने वाले किसी भी लॉ स्टूडेंट को प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

बार कौंसिल ऑफ इंडिया ने ‌अपनी नई ‌अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी से इस साल पास होने वाला कोई भी स्टूडेंट का बार कौंसिल में एनरोलमेंट नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनके पास आवश्यक योग्यता नहीं है।

कानून के मुताबिक देश के किसी भी कोर्ट में प्रैक्टिस करने के लिए वकालत की पढ़ाई करने के बाद बार कौंसिल ऑफ इंडिया में नामांकन होना जरूरी है।
 
गौरतलब है कि जुलाई में डीयू के लॉ फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स का रिजल्ट आने वाला है। ऐसे में उनके लिए किसी भी कोर्ट में प्रैक्टिस करना मुश्किल होगा।

क्यों नहीं अमान्य हुई डिग्री

Law graduates of delhi university not eligible to practise.

गत तीन सितंबर को बार कौंसिल ने डीयू के वाइस चांसलर को नोटिस भेज इस बारे में सूचित  किया है। इसमें बताया गया है कि डीयू ने बार कौंसिल के पास एफिलिएशन और इंसपेक्‍शन के लिए कोई निवेदन नहीं किया है। जबकि किसी किसी भी प्रकार के लीगल एजूकेशन के लिए ऐसा किया जाना जरूरी है।

इसके साथ ही बार कौंसिल का आरोप है कि डीयू ने अपने कोर्स में पहले से बताई गई संख्या से ज्यादा स्टूडेंट्स का दाखिला किया है। साथ ही डीयू के कई सेंटर पर अध्यापकों की शिकायत भी कौंसिल के पास आती रही है।

संभावना है कि डीयू स्टूडेंट कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। हालांकि कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उन्होंने बार कौंसिल से इस बारे में डिटेल मांगी है।

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