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Delhi NCR News: गाजियाबाद के ध्यानार्थ धीरेंद्र शास्त्री की पुस्तक मेरा संन्यासी का लोकार्पण
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नई दिल्ली। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के जन्मोत्सव पर शनिवार को भारत मंडपम में उनकी आध्यात्मिक कृति मेरा संन्यासी के हिंदी और अंग्रेजी संस्करण का लोकार्पण किया गया। समारोह में देश के कई हिस्सों से पहुंचे संत महात्माओं, आध्यात्मिक विभूतियों, विशिष्ट अतिथियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। आयोजन के दौरान वक्ताओं ने गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय आध्यात्मिक मूल्यों और सनातन संस्कृति की प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। पंडित शास्त्री ने बताया कि मेरा संन्यासी उनके परम गुरु संन्यासी बाबा को समर्पित कृति है। पुस्तक के माध्यम से उन्होंने अपने जीवन, आध्यात्मिक यात्रा और लोक कल्याण के संकल्प में गुरु के मार्गदर्शन और आशीर्वाद की भूमिका को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
श्रीराम और हनुमान भक्ति का संदेश
पुस्तक में भगवान श्रीराम और भगवान हनुमान के प्रति भक्ति और समर्पण को आध्यात्मिक उन्नति का आधार बताया गया है। धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, व्यक्ति जब अपने भीतर की चेतना और आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ता है, तब वह स्वयं के साथ समाज के लिए भी सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है। पुस्तक में गुरु परंपरा को मजबूत करने और समाज में आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। लेखक के अनुसार, भारत को विश्वगुरु बनने के लिए केवल अनुयायियों की नहीं बल्कि ऐसे लोगों की भी जरूरत है जो स्वयं समाज को दिशा देने में सक्षम हों। समारोह में मौजूद संतों और अतिथियों ने पुस्तक को गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कृति बताया। वहीं, वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता है जो युवाओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ सकें। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में पुस्तक को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग पुस्तक के विमोचन के साक्षी बने और कार्यक्रम के अंत तक आयोजन स्थल पर मौजूद रहे। बता दें कि मेरा संन्यासी का प्रकाशन इन्विंसिबल पब्लिशर्स की ओर से किया गया है। प्रकाशक की ओर से बताया गया कि पुस्तक को देश के साथ विदेशों में रहने वाले पाठकों तक भी पहुंचाने की योजना है, ताकि इसका आध्यात्मिक संदेश व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच सके।
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श्रीराम और हनुमान भक्ति का संदेश
पुस्तक में भगवान श्रीराम और भगवान हनुमान के प्रति भक्ति और समर्पण को आध्यात्मिक उन्नति का आधार बताया गया है। धीरेंद्र शास्त्री के अनुसार, व्यक्ति जब अपने भीतर की चेतना और आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ता है, तब वह स्वयं के साथ समाज के लिए भी सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है। पुस्तक में गुरु परंपरा को मजबूत करने और समाज में आध्यात्मिक चेतना को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। लेखक के अनुसार, भारत को विश्वगुरु बनने के लिए केवल अनुयायियों की नहीं बल्कि ऐसे लोगों की भी जरूरत है जो स्वयं समाज को दिशा देने में सक्षम हों। समारोह में मौजूद संतों और अतिथियों ने पुस्तक को गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कृति बताया। वहीं, वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक समय में ऐसी पुस्तकों की आवश्यकता है जो युवाओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ सकें। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में पुस्तक को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग पुस्तक के विमोचन के साक्षी बने और कार्यक्रम के अंत तक आयोजन स्थल पर मौजूद रहे। बता दें कि मेरा संन्यासी का प्रकाशन इन्विंसिबल पब्लिशर्स की ओर से किया गया है। प्रकाशक की ओर से बताया गया कि पुस्तक को देश के साथ विदेशों में रहने वाले पाठकों तक भी पहुंचाने की योजना है, ताकि इसका आध्यात्मिक संदेश व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच सके।
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