पैसा बहे तो बहे, पसीना न बहे: दिल्ली-NCR में गर्मी कर रही हाल बेहाल, ठंडक पाने सबसे ज्यादा लोग जा रहे यहां
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से बचने के लिए लोग न केवल ठंडे मौसम की तलाश में हैं, बल्कि स्कूलों की गर्मी की छुट्टियों और वर्क फ्रॉम होम की सुविधा ने भी लंबी यात्राओं को प्रोत्साहित किया है। वहीं, कोविड के बाद लोग प्रकृति और शांत वातावरण की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं।
विस्तार
राजधानी समेत एनसीआर के लोग मौजूदा समय भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहे हैं। ऐसे में आसमान से बरस रही आग से बचने के लिए पहाड़ी इलाके दिल्ली-एनसीआर के लोगों की पसंद बने हुए हैं। उमस भरी गर्मी और लू के थपेड़ों से बेहाल लोग उत्तराखंड के लैंसडाउन को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। वहीं, हिमाचल प्रदेश का शिमला, कसौली, कुल्लू, मनाली और नैनीताल और मसूरी जैसे ठंडे स्थानों ने भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। पर्यटन उद्योग के जानकारों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पहाड़ी इलाकों की यात्रा करने वाले पर्यटकों की संख्या में पिछले साल की तुलना में लगभग 30 फीसदी की वृद्धि देखी गई है।
दिल्ली-एनसीआर में गर्मी से बचने के लिए लोग न केवल ठंडे मौसम की तलाश में हैं, बल्कि स्कूलों की गर्मी की छुट्टियों और वर्क फ्रॉम होम की सुविधा ने भी लंबी यात्राओं को प्रोत्साहित किया है। वहीं, कोविड के बाद लोग प्रकृति और शांत वातावरण की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर पहाड़ी इलाकों की तस्वीरें और ट्रैवल ब्लॉग्स ने भी पर्यटकों को प्रेरित किया है। ऐसे में इसका फायदा पूरे दिल्ली-एनसीआर के लोग उठा रहे हैं।
नजफगढ़ निवासी रोहन सिंह ने बताया कि मई की तुलना में जून की गर्मी ने हालत खराब कर दी है। ऐसे में इस भीषण गर्मी से बचने के लिए उन्होंने अपने परिवार के साथ चार दिन के लिए लैंसडाउन जाने की योजना बनाई है। उन्होंने बताया कि इस जानलेवा गर्मी में पारा भले ही 44 डिग्री सेल्सियस तक हो, लेकिन महसूस 52 डिग्री वाली गर्मी हो रही है।
आतंकी हमले के बाद कश्मीर जाने से कतरा रहे
कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से पर्यटकों के बीच डर का माहौल बरकरार है। आतंकी हमले से पर्यटक अपनी सुरक्षा के लिहाज से कश्मीर में जाने से कतरा रहे हैं। ऐसे में पर्यटकों का कश्मीर जाना बेहद कम हो गया है। ट्रैवल एजेंट रमेश कुमार ने हालात के बारे में बताया कि पर्यटकों ने कश्मीर आना न के बराबर कर दिया है। पहले की तुलना में मात्र 10 से 20 फीसदी पर्यटक ही घूमने आ रहे हैं। इस वजह से ट्रैवल एजेंसियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वह उम्मीद कर रहे हैं कि कश्मीर में जल्द ही पहले जैसा पर्यटन होगा। इसके लिए उन्होंने सरकार से भी अपनी परेशानी पर गौर करने का आग्रह किया है।
बुकिंग में 25-30 फीसदी की वृद्धि दर्ज
दिल्ली टैक्सी, टूरिस्ट ट्रांसपोर्ट एंड टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट ने बताया कि दिल्ली से शिमला, मनाली, मसूरी, नैनीताल और कश्मीर जैसे अन्य इलाकों की ओर जाने वाले पर्यटकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। मई-जून में दिल्ली से इन स्थानों के लिए बुकिंग में 25-30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। विशेष रूप से परिवार और युवा समूह गर्मी की छुट्टियों का फायदा उठाकर इन ठंडे स्थानों पर जा रहे हैं। ऐसे में शिमला और मनाली जैसे लोकप्रिय गंतव्यों में होटल बुकिंग 80 फीसदी से अधिक हो चुकी है।
अधिक मांग के कारण चुकाना पड़ रहा ज्यादा किराया
यात्रा की बढ़ती मांग के साथ किराये में भी वृद्धि देखी जा रही है। दिल्ली से हिमाचल और उत्तराखंड के लिए बस और ट्रेन टिकटों की कीमतों में 15-20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि ज्यादातर पर्यटक बसों से जाना पसंद करते हैं, क्योंकि यह आरामदायक और किफायती होता है। ऐसे में बसों के किराये में 50 से 60 फीसदी इजाफा देखने को मिल रहा है। इसके अलावा होटल और गेस्ट हाउस की कीमतों में भी 10-15 फीसदी की वृद्धि हुई है, क्योंकि मांग अधिक है और उपलब्धता सीमित है।
| दिल्ली से | सामान्य किराया | मौजूदा किराया |
| लैंसडाउन 258 किमी | 500-1000 (रु.) | 840-1610 (रु.) |
| मसूरी 276 किमी | 912-1249 | 1099-2649 |
| नैनीताल 276 किमी | 510-1449 | 1100-1649 |
| शिमला 341 किमी | 499-1848 | 1250-1849 |
| कुल्लू 476 किमी | 1000-1200 | 1030-2900 |
| मनाली 512 किमी | 499-1800 | 1045-2650 |
नोट : ट्रैवल एजेंसी के अनुसार