होटल में वेटर रहा शख्स यूं बना सपा सरकार में मंत्री
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लोकसभा चुनाव के बाद से टलता आ रहा मंत्रिमंडल का विस्तार शनिवार को पूरा हो गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार सपा से तीन बार विधायक चुने गए मदन चौहान को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेदारी दी गई है।
विधानसभा चुनाव-2017 के लिए पार्टी ने रणनीति के तहत ही पश्चिमी यूपी में मजबूती दिलाने के लिए मदन को जिम्मेदारी सौंपी है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, सहारनपुर, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर और गाजियाबाद आदि की 42 विधानसभा सीटों में से छह ही पार्टी के विधायक हैं और मदन पहले हिंदू मंत्री बने हैं।
नोएडा के सेक्टर-26 निवासी मदन चौहान ने 2002 में भाजपा की परंपरागत सीट गढ़ में सपा का झंडा लहराया था। जनता में मजबूत पकड़ का ही नतीजा रहा है कि 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में लगातार जीत हासिल करते रहे।
पारिवारिक पृष्ठभूमि रही राजनीतिक
पार्टी ने उनकी अहमियत को समझकर ही 2009 में गौतमबुद्धनगर से लोकसभा का टिकट दिया, लेकिन पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव के पास जाकर उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह भाटी का टिकट नहीं काटना चाहिए, उनकी बात को माना गया और वह स्वयं चुनाव नहीं लड़े।
मंत्री बनते ही खूब बजा ढोल-
शनिवार को जैसे ही मदन ने शपथ ली तो सेक्टर-26 नोएडा आवास पर जमकर ढोल बजे। उनके पैतृक गांव मदारपुर मेरठ, गढ़ क्षेत्र और लखनऊ में लड्डू बंटे।
मदारपुर में उनके पिता ठाकुर करमवीर सिंह चौहान किसान हैं। हालांकि, पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीतिक ही रही है। माता तृप्ति चौहान गन्ना सोसायटी की निदेशिका निर्विरोध चुनी गई थीं। चाचा जयपाल सिंह सरधना ब्लाक प्रमुख और ताऊ मनसा राम चौहान ग्राम प्रधान रह चुके हैं।
अमर सिंह से नजदीकी के चलते लगा झटका
ओबराय होटल में थे वेटर-
परिवार के सदस्य बताते हैं कि मदन चौहान ने युवावस्था में दिल्ली के ओबराय होटल में वेटर का काम शुरू किया था और छोटे भाई अशोक चौहान व सुभाष चौहान की पढ़ाई पूरी कराई।
इसके बाद 25 साल पहले नोएडा आ गए। प्रॉपर्टी डीलर और ट्रांसपोर्ट कारोबार से भी जुडे़। उन्होंने अपना राजनीतिक क्षेत्र गढ़ ही चुना।
विवाद ने झटका भी दिया-
जिस वक्त सपा में अमर सिंह सर्वेसर्वा थे तो मदन उनके भी नजदीकी रहे। अमर सिंह को जब पार्टी ने अलविदा कहा तो मदन के विरोधियों ने पार्टी हाईकमान से कहा कि मदन तो अमर सिंह के आदमी हैं।
कुछ दिन के लिए सपा ने उनसे दूरी भी बना ली थी, लेकिन तब मदन ने कहा था कि वह तो पार्टी के सच्चे सिपाही हैं और सच्चाई सामने आ जाएगी। बाद में पार्टी ने माना कि मदन सही हैं।