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दिल्लीः मांझे ने परिंदों से छीना उड़ने का हक, बेपरवाह पतंगबाजी साबित हो रही है जानलेवा
Mon, 17 Aug 2020 06:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 17 Aug 2020 06:38 AM IST
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घायल परिंदा...
- फोटो : अमर उजाला
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पतंगबाजी के खतरनाक खेल ने एक बार फिर सैकड़ों परिंदों से उनके उड़ने का हक छीन लिया है। धारदार मांझे ने न सिर्फ बेजुबां परिंदों की परवाज पर डाका डाला बल्कि कई की जान तक ले ली। किसी के पंख कट गए हैं तो किसी की गर्दन पर गहरा घाव है।
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चांदनी चौक स्थित जैन मंदिर में चल रहे दुनिया के पहले चैरिटी पक्षी अस्पताल में एक से 15 अगल्त के बीच 1400 घायल परिंदों को भर्ती कराया गया है। अस्पताल के सचिव सुनील जैन ने बताया कि पतंग से घायल व मरने वाले पक्षियों का आंकड़ा कई गुना अधिक होगा। बहुत से पक्षियों को किसी ने देखा ही नहीं होगा, उनकी मौत हो गई होगी।
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अस्पताल में अकेले 15 अगस्त को ही 150 पक्षियों को भर्ती किया गया है जिनमें से अधिकतर कबूतर, चील, कौवे और तोते हैं। इस माह बकरीद, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस जैसे त्योहारों के दौरान हुई पतंगबाजी के चलते घायल हुए 80 से 90 पक्षी यहां लाए गए हैं।
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अब जीवन भर उड़ नहीं पाएंगे ये बंजुबां
पतंग के मांझे से घायल अधिकतर पक्षी जीवन में दोबारा उड़ नहीं पाते। सुनील जैन ने बताया कि पालतू पक्षियों के अलावा जो भी पक्षी यहां लाए जाते हैं, उन्हें यहीं भर्ती कर लिया जाता है लेकिन ऐसी हालत में ये ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रह पाते।
सरकार मांझे पर रोक लगाए
सुनील जैन के मुताबिक पुरानी दिल्ली में अधिक व पूरी दिल्ली में ही धड़ल्ले से चाइनीज मांझा बिक रहा है। इसके अलावा कांच और केमिकल से बना भारतीय मांझा भी कम खतरनाक नहीं है। सरकार को इसपर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिये। सबसे अधिक मामले पुरानी दिल्ली, कमलानगर, शक्ति नगर, लक्ष्मी नगर, शास्त्री नगर से आए हैं।
सन् 1957 से चल रहा नि:शुल्क अस्पताल
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि सन 1957 से ही दान-दाताओं के सहयोग से पक्षियों का नि:शुल्क अस्पताल चल रहा है। लेकिन कोरोना महामारी के कारण इस समय न के बराबर सहयोग मिल रहा है। इसके बावजूद प्रतिदिन सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक अस्पताल की ओपीडी में इलाज हो रहा है।