रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक निकाली हल्ला बोल रैली, बड़ी संख्या में जुटे मजदूर और किसान
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केंद्र सरकार के खिलाफ वाम दल समर्थित मजदूरों और किसानों ने बुधवार को रामलीला मैदान से संसद मार्ग तक केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोल रैली निकाली। संसद मार्ग पर हुई सभा में बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने, श्रम-कानूनों को सख्ती से लागू करने, न्यूनतम मजदूरी, रोजगार मुहैया कराने, फसलों के उचित दाम देने की मांग की।
मजदूर-किसान संघर्ष रैली में देशभर से लोग पहुंचे। आशा वर्कर्स भी धरने-प्रदर्शन में शामिल हुईं। रैली का आयोजन सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीआईटीयू), ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) और ऑल इंडिया एग्रीकल्चर वर्कर्स यूनियन (एआईएडब्ल्यूयू) के नेतृत्व में किया गया।
किसान सभा के अध्यक्ष कॉमरेड अशोक धवल ने नौकरियों में भर्ती पर रोक हटाने, सबको बेहतर रोजगार देने, न्यूनतम मजदूरी 18 हजार देने की मांग रखी। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को मजदूर व किसान विरोधी बताया। सभा का संचालन सीआईटीयू अध्यक्ष कॉमरेड हेमलता ने किया। मंच से दर्जनों संगठनों ने अपनी-अपनी मांगें रखीं। कलाकारों ने प्रदर्शनकारियों में जोश भरा।
पहली बार सरकार के खिलाफ रैली में किसान और मजदूर हुए एकजुट
कॉमरेड तपन सेन ने कहा कि आजाद भारत में पहली बार सरकार के खिलाफ रैली में किसान और मजदूर एकजुट होकर हिस्सा ले रहे हैं। सरकार सिर्फ धनी और कॉरपोरेट घरानों के हित साधने वाली नीतियां बना रही है। इसका सीधा असर गरीब मजदूरों और किसानों पर पड़ रहा है।
आशा वर्कर कमेटी अध्यक्ष रंजना नरुला ने कहा कि सच्चाई यह है कि पूरी दुनिया में महिलाओं व बच्चों की मौत सबसे अधिक हमारे यहां होती है। बीमा के नाम पर बड़ी कंपनियों को मुनाफा दिया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं का भी सरकार निजीकरण कर रही है।
यह रहीं मुख्य मांगें
. न्यूनतम वेतन 18 हजार किया जाए।
. महंगाई पर लगाम लगाई जाए।
. फसलों का उचित दाम दिया जाए।
. खेतिहर मजदूरों का कर्ज माफ किया जाए।
. मनरेगा में बजट कटौती बंद हो और बकाया दिया जाए।
. शहरी क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजना लागू की जाए।