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जिस दिन सरकार किसानों की बात मान लेगी उसी दिन मनाएंगे नया वर्ष, नई उमंग व जोश से भरा नजर आया प्रत्येक किसान

Fri, 01 Jan 2021 08:35 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 01 Jan 2021 08:35 PM IST
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kisan andolan when government agrees to farmers they will celebrate the new year
कृषि कानूनों का विरोध करते किसान - फोटो : amar ujala

सर्दी अपने चरम पर है और पारा लगातार गिरकर कीर्तिमान गढ़ रहा है। हाड़ कंपा देने वाली इस ठंड में भी किसानों का हौसला बुलंद है और उनका आंदोलन शुक्रवार को 37वें दिन भी निर्बाध तरीके से जारी रहा। किसानों ने कहा कि सरकार जब तक उनकी मांगें नहीं मान लेती वह इसी तरह से डटे रहेंगे। जिसदिन तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया जायेगा वह उसी दिन नए साल का जश्न मनाएंगे। 

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नए वर्ष के मौके पर भी किसान सुबह से शाम तक रोजाना की तरह लंगर बनाते-खाते व सरकार के खिलाफ मोर्चा संभालते दिखे। शुक्रवार को टीकरी बॉर्डर पर पहले की अपेक्षा अधिक भीड़ थी। नए वर्ष के मौके पर किसानों को पंजाब, हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली के आम नागरिकों का भारी समर्थन मिला। हजारों की संख्या में युवाओं के अलावा महिलाओं और बच्चों ने टीकरी बॉर्डर पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया। 
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संगरूर से बड़ी संख्या में महिलाओं का हुजूम टीकरी बॉर्डर पहुंचा था। जिन्होंने किसानों का मंच भी साझा किया। महिलाओं का नेतृत्व कर रहीं बीबी करणजीत कौर ने कहा कि किसान नहीं तो कैसी खुशियां। सरकार किसानों के हक में फैसला करे तभी देश बचेगा। 
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उन्होंने कहा कि अब देश का हर नागरिक इस बात को भली भांति समझता है कि किसानों की उनके जीवन में क्या अहमियत है। पंजाब के किसानों ने देशभर के किसानों के साथ-साथ शहरी नागरिकों को भी जगाने का काम किया है। यह आंदोलन लोगों की आंख खोलने वाला है। सरकार को किसानों की बात हर हाल में माननी ही पड़ेगी। टीकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच चार जनवरी को सरकार से होने वाली उनकी बातचीत की भी चर्चा हुई। लोगों ने कहा कि सरकार चाहे तो पल भर में आंदोलन का हल निकाल सकती है। 

खीर और हलवे के साथ किया नए साल का स्वागत

सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनरत किसानों ने नए वर्ष का स्वागत शुभ के तौर पर खीर और हलवे के साथ किया। नव वर्ष के मौके पर बॉर्डर पर शुक्रवार को किसान वर्ग नई उमंग और नई जज्बे के साथ नजर आया। वहीं, किसानों ने साल की शुरुआत के साथ ही मांगे पूरी न होने तक बॉर्डर से न हटने का प्रण लिया।
 
सिंघु बॉर्डर पर सुबह से ही नए वर्ष को लेकर तैयारियां शुरू हो गई थी। दूर-दूर तक नए साल की चमक नजर आ रही थी। कोई गले मिलकर तो कोई अपने परिवार को वीडियो कॉल के माध्यम से बधाई दे रहा था। इस दौरान कुछ किसानों की परिवार से दूर होकर आंखें नम थी तो कोई परिवार के जल्द मिलने का वादा कर रहा था। 

नए साल के जश्न में गाजर के हलवे व खीर की मिठास
किसानों ने नए साल के जश्न में गाजर के हलवे व खीर की मिठास को शामिल किया। इस दौरान गुड़ की खीर व मिठाई आदि बांटकर नया साल मनाया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी। आंदोलनरत एक किसान बलविंदर ने कहा कि नए साल की शुरुआत शुभ हो इसके लिए मीठे का लंगर लगाया गया है। इसका उद्देश्य केंद्र तक अपनी आवाज को नम्र रुप में पहुंचाना है। क्योंकि, किसान वर्ग किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करता है। वहीं, एक अन्य किसान हरदीप सिंह ने कहा कि नए साल की शुरुआत के लिए एक दिन पहले ही मेन्यू तय कर लिया गया था। इसमें गाजर का हलवा, खीर और अन्य मिठाइयों को शामिल किया गया था जिससे नए साल की शुरुआत शुभ हो। 
 

दिल्ली वालों ने सेवा कर मनाया नया वर्ष 

नव वर्ष के अवसर पर दिल्ली से भी कई लोग सिंघु बॉर्डर पर सेवा करने के लिए पहुंचे। वहीं, कई लोगों ने दान भी किया। परिवार के साथ पहुंचे बच्चों ने भी लंगर में सेवा करने के साथ-साथ सफाई व्यवस्था आदि की जिम्मेदारी संभाली। सुबह से लेकर शाम तक दिल्ली से सेवा के लिए पहुंचने वाले लोगों का दौर जारी रहा। इस दौरान बॉर्डर से पहले ही गाड़ियों की लंबी लाइन भी लग गई थी जिसको संभालने के लिए यातायात पुलिस भी तैनात थी।

दिनभर चला भजन कीर्तन
किसानों ने नए वर्ष का स्वागत गुरबाणी और भजन-कीर्तन के साथ भी किया। सुबह से लेकर शाम तक के कई संगतों ने बॉर्डर पर गुरु का पाठ किया। वहीं, अन्य लोगों को भी धार्मिक रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान सिख धर्म से संबंधित वीर पुरुषों की वीरगाथा भी सुनाई गई। 

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