सरकार चलाने के साथ 'आप' का विस्तार भी करेंगे केजरीवाल

Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal
Updated Tue, 18 Feb 2020 01:43 AM IST
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अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल - फोटो : ANI

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आम आदमी पार्टी (आप) को दिल्ली में मिली जीत से बड़ी उम्मीद है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बेशक खुद को दिल्ली का बेटा बताते हुए दिल्ली को वैश्विक शहर बनाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन बतौर पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक उनकी नजर आप के मिशन विस्तार पर भी है। शपथ ग्रहण समारोह के दूसरे दिन सोमवार को विभागों के बंटवारे से इसका इशारा भी उन्होंने कर दिया है।
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अपने पास कोई विभाग रखने की जगह केजरीवाल ने अपना पूरा काम उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कैबिनेट सहयोगियों पर डाल दिया है। उनके इस मॉडल से दिल्ली सरकार भी चलेगी और पार्टी का विस्तार भी होगा। विभाग न होने से केजरीवाल सीधे तौर पर विपक्षियों के निशाने पर भी नहीं होंगे।


दरअसल, शपथ ग्रहण करने के बाद ही आप की करीब 20 प्रादेशिक इकाइयों के पदाधिकारियों के साथ रविवार शाम वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने बैठक की। इसमें अगले एक महीने में एक करोड़ नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, राज्य इकाइयों का निगम चुनाव लड़ने का फैसला करने की छूट भी दी गई है। इसके अलावा जल्द ही आप की राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) की बैठक में दूसरे प्रदेशों में चुनाव लड़ने का भी फैसला होना है। दूसरी तरफ दो साल बाद होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को ताकत लगानी है। मिशन विस्तार की इस रणनीति का चेहरा अरविंद केजरीवाल ही होंगे।

पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि इन्हीं सियासी हालात में वरिष्ठ नेताओं के बीच कैबिनेट पर चर्चा हुई। इसमें तय किया गया कि विभाग विशेष की जिम्मेदारी संभालने की जगह मुख्यमंत्री विभागों के बीच तालमेल बनाने व सरकार के नवाचारों पर फोकस करें। साथ ही बतौर राष्ट्रीय संयोजक मिशन विस्तार को भी धार देने पर ध्यान दें।

इससे दिल्ली सरकार भी बेहतर तरीके से चलेगी। साथ ही वह अपनी इसके काम का देशव्यापी प्रचार-प्रसार भी कर सकेंगे। इसी रणनीति के तहत केजरीवाल ने अपने इकलौते विभाग को कैबिनेट सहयोगी सत्येंद्र जैन को सौंप दिया है।

पंजाब विधानसभा चुनाव पर ध्यान

दिल्ली में हैट्रिक लगाने के बाद आप का पूरा ध्यान दो साल बाद होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव पर है। पार्टी रणनीतिकारों को उम्मीद है कि इस बार पंजाब से अच्छी खबर मिल सकती है। खासतौर से इसलिए भी कि 2017 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाली आप मुख्य विपक्षी दल बनने में कामयाब रही थी। पिछले चुनाव में मिले अनुभवों के आधार पर आप पंजाब चुनाव में उतरेगी।

इसमें दिल्ली सरकार का शासनिक मॉडल मददगार साबित होगा। वहीं, दिल्ली एमसीडी चुनाव पर भी आप की नजर है। इसके अलावा पार्टी हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड सरीखे उन राज्यों में चुनाव लड़ने का फैसला कर सकती है, जहां कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधी टक्कर है।

जनभागीदारी की योजनाओं से जुड़ेंगे

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद को दिल्ली में जनभागीदारी से जुड़े प्रोजेक्ट से जोड़ेंगे। उनकी कोशिश वैकल्पिक राजनीति के आप के मॉडल को हकीकत बनाने की होगी। खास जोर मोहल्ला सभाओं पर होगा। इससे केजरीवाल का ज्यादा समय आम लोगों के बीच गुजरेगा और उनकी जननेता की छवि मजबूत होगी।

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