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दिल्ली पुलिस से उम्मीद छोड़ अब केजरीवाल ने जनता से मांगे सुझाव

Mon, 26 Oct 2015 02:14 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Oct 2015 02:14 PM IST
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Kejriwal government sought suggestions from the public on women's safety.

देश के राजनैतिक पटल पर जब आम आदमी पार्टी का उदय हुआ तो लोगों ने इसे आम आदमी से सीधे तौर पर जुड़ी और सबसे अलग पार्टी के तौर पर देखा था। राष्ट्रीय राजधानी में आम आदमी पार्टी ने जब पहली बार सरकार बनायी तो उसका आधार भी वोटिंग के बाद जनमत संग्रह ही बना था।

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उसके बाद से हमेशा ही अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम राय और जनमत संग्रह के प्रति काफी संवेदनशील रही है। हालांकि ये बात अलग है कि विरोधियों और राजनैतिक पंडितों के द्वारा पार्टी की इस नीति की आलोचना भी की गई।
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क्योंकि जनता अगर सरकार चुनती है तो राज्य के शासन-प्रशासन के प्रति जवाबदेही और जिम्मेदारी प्राथमिक तौर पर सरकार की ही बनती है। दरअसल अपनी इसी लाइन पर आगे बढ़ते हुए अब दिल्ली सरकार ने महिला सुरक्षा पर जनता के सुझाव मांगे हैं।
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महिला एंव बाल विभाग विकास, दिल्ली सरकार द्वारा देश के मीडिया खासकर प्रिंट मीडिया में दिए गए विज्ञापनों में महिला सुरक्षा के लिए गठित मंत्रिमंडल समूह ने जनता से सुझाव मांगे हैं। इसमें सबसे ऊपर लिखा है कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के लिए अपने सुझाव दें।

विज्ञापन में जनता से मांगे सुझाव

Kejriwal government sought suggestions from the public on women's safety.

गौरतलब है कि दिल्ली में हाल ही में हुई मासूम बच्चियों से गैंगरेप की घटनाओं के बाद अरविंद केजरीवाल ने इन घटनाओं के लिए दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।

जबकि विपक्ष ने केजरीवाल से महिला सुरक्षा पर बुलाए गए विशेष सत्र और इन घटनाओं के राजनीतिकरण करने पर सवाल उठाए थे। इसके बाद केजरीवाल ने कैबिनेट बैठक कर महिला सुरक्षा पर मंत्रियों के एक समूह का गठन किया।

जिसे महिला सुरक्षा के लिए कारगर सुझाव और अपराधों को रोकने के लिए अपनाई जाने वाली नीतियां सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। लेकिन अब मंत्रिमंडल समूह ने इससे आगे बढ़ते हुए जनता से ही सुझाव मांगे हैं।

आम जनता से पूछा गया है कि क्या बच्चियों से जघन्य अपराध करने वालों की कम से कम सजा फांसी हो या आजीवन कारावास? क्या हत्या और बालात्कार जैसे अपराधों में शामिल अपराधियों को बाल अपराधी मानने की उम्र सीमा 18 वर्ष से कम कर 15 वर्ष कर देनी चाहिए?

पुलिस कार्रवाई व कोर्ट सुनावाई पर भी पूछा सवाल

Kejriwal government sought suggestions from the public on women's safety.

इसके अलावा पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट न होने की स्थिति में दिल्ली सरकार के सहयोग को लेकर भी सवाल पूछा गया है। वहीं कोर्ट और फास्ट ट्रैक कोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई को लेकर भी सुझाव मांगे गए हैं।

मतलब साफ है कि सरकार ने महिला सुरक्षा के जिन मुद्दों और बिंदुओं को लेकर मंत्रिमंडल समूह का गठन किया था उन्हीं सवालों को अब जनता के सामने रख दिया गया है।

बता दें कि दिल्ली सरकार पर हमेशा ही दिल्ली की जनता की समस्याओं पर कारगर रणनीति बनाने और उनका हल निकालने के बजाय जनता के पैसे विज्ञापनों में बर्बाद करने का आरोप लगता रहा है।

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