संविधान में केजरीवाल नहीं दिल्ली सरकार का नाम है
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राजधानी में अब विज्ञापनों में केजरीवाल सरकार लिखने को मुद्दा बनाकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में तर्क रखा है कि संविधान में केजरीवाल सरकार का कोई स्थान नहीं है, बल्कि दिल्ली सरकार का हवाला दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ के समक्ष यह जनहित याचिका वरुण कुमार माहला ने दायर की है। याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी।
याची ने कहा है कि पिछले कुछ अरसे से मेट्रो रेल, समाचार पत्रों, टीवी चैनल में विज्ञापन आ रहे हैं कि -केजरीवाल सरकार ने रचा इतिहास, यही है केजरीवाल सरकार का वायदा-जो कहा वो किया।
ये सविंधान का उल्लंघन है!
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 239 में स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र या फिर दिल्ली सरकार का उल्लेख है।
याची ने कहा कि कहीं भी किसी व्यक्ति विशेष के नाम से सरकार का उल्लेख नहीं है। बावजूद इसके आम लोगों व सरकारी धन का दुरुपयोग कर एक व्यक्ति केजरीवाल के नाम को महामंडित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विज्ञापन संविधान के अनुच्छेद 14 व 19 में किए गए प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि दिल्ली सरकार को केजरीवाल सरकार के नाम से जारी सभी विज्ञापनों को वापस लेने का निर्देश दिया जाए।