दिल्ली में केजरीवाल को नहीं मिल रहे किराये पर घर
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लंबी कशमकश के बाद आखिरकार दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकारी घर छोड़ने का मन बना लिया था। वह आज यानी बुधवार को सरकारी आवास से किराये घर में शिफ्ट होने वाले थे।
लेकिन ऐन मौके पर केजरीवाल जिसके घर में शिफ्ट होने जा रहे थे उसने केजरीवाल को अपना किरायेदार बनाने से मना कर दिया। पांच मामलों में मकान मालिक केजरीवाल के नाम पर अपना घर किराये पर देने को तैयार नहीं हुए।
पिछले हफ्ते मयूर विहार में बात बनी थी, लेकिन शिफ्ट होने से ऐन पहले मकान मालिक मुकर गया। अब नए सिरे से उनके लिए मकान ढूंढा जा रहा है।
कैसा मकान चाहते हैं केजरीवाल?
दरअसल, सरकारी आवास छोड़ने के बाद केजरीवाल ऐसा मकान चाहते हैं, जहां सपरिवार रहने के साथ अपना ऑफिस भी चला सकें। ऐसे में उन्हें एक बड़े मकान की जरूरत है।
पिछले दिनों मयूर विहार, जंगपुरा, ग्रीन पार्क, महारानी बाग, राजेंद्र नगर जैसे इलाकों में उनके लिए मकान देखा गया।
इसमें से कुछ उन्हें पसंद नहीं आए। जबकि पांच मामलों में मकान मालिक केजरीवाल के नाम पर घर देने को तैयार नहीं हुए।
क्यों लोग केजरी को नहीं बनाना चाहते किरायेदार?
पिछले हफ्ते मयूर विहार में एक मकान पसंद आया था। मकान मालिक भी तैयार था। लेकिन शिफ्ट करने से पहले ही उसने मना कर दिया। पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि मकान मालिक को केजरीवाल के नाम से आपत्ति नहीं थी।
इसकी जगह उसको फिक्र थी कि उनके मकान में जाने में मीडिया व पार्टी कार्यकर्ताओं की आवाजाही बढ़ेगी। भीड़ बढ़ने से मकान मालिक के साथ पड़ोसियों की निजी जिंदगी में खलल पड़ेगी।
उसकी बड़ी दिक्कत इसलिए भी थी कि उसने एमसीडी से पास नक्शे के अलावा एक अलग कमरा भी बना रखा है। मीडिया के जुटने से पर यह सार्वजनिक हो जाती और उसे सफाई देनी पड़ती।
... तो 30 को 'बेघर' हो जाएंगे केजरीवाल?
पार्टी प्रवक्ता दिलीप पांडेय ने भी इसकी पुष्टि की। पांडेय के मुताबिक, मयूर विहार में मकान फाइनल हो गया था। लेकिन रविवार को मकान मालिक ने मना कर दिया। अब फिर से नया मकान ढूंढा जा रहा है। तीन-चार जगह बात चल रही है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद केजरीवाल को तिलक लेन में सरकारी आवास मिला था। केजरीवाल ने 49 दिन की सरकार चलाकर इस्तीफा दे दिया। ऐसे में उन्हें मकान खाली करना था।
लेकिन अपने बच्चों की परीक्षा की बात करते हुए मकान में रहने की गुजारिश की थी। इस अर्जी पर राहत देते हुए दिल्ली सरकार ने तीस जून तक मकान केजरीवाल के नाम आवंटित कर दिया। हालांकि, इसके लिए उन्हें बाजार दर पर किराया देना पड़ रहा है।