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टांय-टांय फुस हुआ कपिल मिश्रा का प्लान, कलावती नहीं जा सकी राज्यसभा क्योंकि...

Sat, 06 Jan 2018 10:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 06 Jan 2018 10:39 AM IST
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kapil mishra plan to send kalawati to rajya sabha became drama as bjp denied to support her
कलावती - फोटो : अमर उजाला

आम आदमी पार्टी की दिवंगत नेता संतोष कोली की मां कलावती कोली को आप के सुशील गुप्ता के खिलाफ राज्यसभा उम्मीदवार बनाने की दिल्ली सरकार से बर्खास्त मंत्री कपिल मिश्रा की रणनीति टांय-टांय फुस हो गई।

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मिश्रा ने एक ड्रामे के तहत कलावती को उम्मीदवार घोषित भी कर दिया और समर्थन के लिए मुख्यमंत्री निवास भी पहुंचे, लेकिन वे उनके लिए समर्थन जुटाने का ड्रामा करते ही नजर आए। राज्यसभा सीट के लिए नामांकन की औपचारिकता पूरी करने की कड़ी में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के विधायको से समर्थन तक नहीं मांगा।
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राज्यसभा के लिए आप के प्रत्याशियों की घोषणा के बाद से ही कपिल मिश्रा एक बार फिर अक्रामक हो गए। वे कल राजधाट पर मौन धारण कर भी पंहुचे। देर शाम पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी सुशील गुप्ता के खिलाफ कलावती को प्रत्याशी भी घोषित कर दिया।
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आज प्रात: मुख्यमंत्री निवास पर भी पंहुचे। सभी विधायकों को समर्थन देने के लिए फोन भी घुमाते रहे। बावजूद इसके वे कलावती के लिए प्रस्तावकों की तय संख्या भी जुटाने में कामयाब नहीं हुए। 

यदि करते समर्थन तो भाजपा आ जाती आप के निशाने पर

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कलावती - फोटो : अमर उजाला

माना जा रहा था कि वे अपने अलावा कलावती के नामांकन पर आप से नाराज चल रहे विधायक कर्नल देवेन्द्र सिंह, पंकज पुष्कर, संदीप कुमार, जितेन्द्र तोमर, आसिम अहमद के हस्ताक्षर करवा सकते है।

इसके अलावा आजकल उनकी भाजपा नेताओं से भी घनिष्ठता बनी हुई है और संभवत: भाजपा के चार में से कुछ विधायकों के हस्ताक्षर करवा ले। शाम होते-होते उनके अभियान की हवा निकल गई। भाजपा ने आप की अंदरूनी कलह से स्वयं को दूर रखना ही उचित समझा।

भाजपा नेता नहीं चाहते थे कि नामांकन पर समर्थन देकर केजरीवाल के खिलाफ चल रही हवा को अपनी तरफ मोड़ा जाए। पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं एवं विधायकों ने बताया कि कपिल मिश्रा ने हालांकि उनसे संपर्क नहीं किया लेकिन यदि वे करते भी तो हम किसी भी हालत में कलावती के नामांकन का समर्थन करने वाले नहीं थे।

उधर नामांकन के लिए तय सदस्यों की संख्या पूरी न होते देख आप के नाराज विधायकों ने भी इस विवाद से दूर रहने में ही भलाई समझी। यानि कुल मिलाकर कपिल मिश्रा का अभियान एक ड्रामा बन कर ही रह गया।

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