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कांत एंक्लेव में 20 आशियाने ध्वस्त, निवासियों ने काले झंडे दिखाकर किया विरोध
Mon, 01 Apr 2019 04:15 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Mon, 01 Apr 2019 04:15 PM IST
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कांत एंक्लेव में 20 आशियाने ध्वस्त, लोगों ने दिखाए काले झंडे
- फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद के अरावली संरक्षित वन क्षेत्र में बसे कांत एंक्लेव के बीस आशियानों को ध्वस्त करने आज सुबह ही निगम की टीम पहुंची। निगम की टीम के साथ जेसीबी के पहुंचते ही कांत एंक्लेव में रहने वालों ने काले झंडे दिखाकर टीम का विरोध किया।
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हालांकि इस मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रही और टीम ने अपना काम जारी रखा। गौरतलब है कि अधिकतर मालिकों ने मकान पहले ही खाली कर दिए थे, जबकि कुछ लोग कार्रवाई रुकने की आस में अपने घरों में जमे हुए थे।
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कांत एंक्लेव में सोमवार को बीस घर तोड़ने के लिए हुडा और नगर निगम प्रशासन के तोड़फोड़ दस्तों की सरगर्मियां रविवार से ही तेज हो गई थीं। प्रशासन की ओर से कांत एंक्लेव में रविवार को ही छह पोकलेन सहित कई जेसीबी पहुंचा दी गई थी। सोमवार को सुबह सात बजे से ही तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी गई। अधिकतर मालिकों ने अपने मकान तो खाली कर दिए थे लेकिन घर नहीं छोड़े थे।
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कांत एंक्लेव प्लॉट बायर्स एसोसिएशन के प्रधान सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मोहिंदर बीर आनंद वीएसएम ने अपना मकान खाली नहीं किया था। उन्होंने रविवार को बताया था कि फौज का नियम है अंत तक लड़ना, फौजी होने के नाते वह भी अंतिम क्षण तक संघर्ष करेंगे।
कांत एंक्लेव में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का लाइसेंस वर्ष 1974 में दिया गया था। बिल्डर ने यहां छोटे बड़े करीब 1600 प्लॉट काटे थे। वर्ष 1992 मेें सरकार ने इस जमीन को पीएलपीए के दायरे में शामिल कर लिया था। सामाजिक कार्यकर्ता एमसी मेहता ने संरक्षित क्षेत्र बताते हुए कांत एंक्लेव सहित काफी बड़े क्षेत्र को खाली करवाने की याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की थी।
2008 में सर्वोच्च न्यायालय ने कांत एंक्लेव, सहित काफी बड़े इलाके को खाली कराने और निर्माण तोड़ने का फैसला सुनाया था। फैसले के खिलाफ कांत एंक्लेव सहित कई लोगों ने पुनर्विचार याचिका डाली थी। सितंबर 2018 में सर्वोच्च न्यायालय ने कांत एंक्लेव को पीएलपीए संरक्षित क्षेत्र घोषित करते हुए सभी सरकार को निर्माण गिराने का आदेश दिया था।
मकान मालिकों का मुआवजा राशि तय होने में यह कार्रवाई टलती रही। इस दौरान सर्वोच्च न्यायालय में 22 लोगों ने शपथपत्र दाखिल कर 31 जुलाई तक खुद ही निर्माण गिराने का समय मांगा। 20 मालिकों ने शपथपत्र दाखिल नहीं किया था, उनके मकान 31 मार्च के बाद तोड़े जाने हैं।