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Delhi NCR News: पं. राजन मिश्र की 75वीं जयंती पर सुरों से गूंजा कमानी
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नई दिल्ली। कमानी ऑडिटोरियम में बीती शाम आरएएस ट्रस्ट की तरफ से संगीत संध्या आयोजित हुई। इसमें शास्त्रीय संगीत जगत ने पंडित राजन मिश्र को 75वीं जयंती पर सुरों के माध्यम से भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सभागार भक्ति, स्मृति और संगीत के रस से भर उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत पंडित रितेश मिश्र और पंडित रजनीश मिश्र की प्रस्तुति से हुई। दोनों ने अपने पिता और गुरु की याद में मधुर आलाप सजाई कि वातावरण भाव-विभोर हो उठा। तबले पर पंडित मिथिलेश झा और हारमोनियम पर पंडित सुमित मिश्र ने सुंदर संगति दी। इसके बाद सरोद सम्राट उस्ताद अमजद अली खान को सरोद ऋषि की उपाधि से सम्मानित किया गया। सम्मान के पश्चात उनकी सरोद की तानों ने शाम को दिव्य बना दिया। वहीं, तबले पर पंडित कुमार बोस ने संगत की। सुरों की लहरियों ने मानो पूरे सभागार को साधना के रंग में रंग दिया। इस संगीतमय कार्यक्रम का संचालन ऋचा अनिरुद्ध ने किया। उन्होंने कहा कि यह केवल संगीत नहीं, बल्कि परंपरा और श्रद्धा का संगम है। वहीं, इस दौरान आरएएस ट्रस्ट ने घोषणा की कि पंडित राजन मिश्र की 75वीं जयंती वर्षभर विशेष आयोजनों और छात्रवृत्तियों के साथ मनाई जाएगी। यह शाम गुरु-शिष्य परंपरा, प्रेम और संगीत साधना की अनंत धारा को समर्पित रही। जहां हर राग ने एक स्मृति को जीवंत किया और हर सुर ने एक श्रद्धांजलि दी। संवाद
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कार्यक्रम की शुरुआत पंडित रितेश मिश्र और पंडित रजनीश मिश्र की प्रस्तुति से हुई। दोनों ने अपने पिता और गुरु की याद में मधुर आलाप सजाई कि वातावरण भाव-विभोर हो उठा। तबले पर पंडित मिथिलेश झा और हारमोनियम पर पंडित सुमित मिश्र ने सुंदर संगति दी। इसके बाद सरोद सम्राट उस्ताद अमजद अली खान को सरोद ऋषि की उपाधि से सम्मानित किया गया। सम्मान के पश्चात उनकी सरोद की तानों ने शाम को दिव्य बना दिया। वहीं, तबले पर पंडित कुमार बोस ने संगत की। सुरों की लहरियों ने मानो पूरे सभागार को साधना के रंग में रंग दिया। इस संगीतमय कार्यक्रम का संचालन ऋचा अनिरुद्ध ने किया। उन्होंने कहा कि यह केवल संगीत नहीं, बल्कि परंपरा और श्रद्धा का संगम है। वहीं, इस दौरान आरएएस ट्रस्ट ने घोषणा की कि पंडित राजन मिश्र की 75वीं जयंती वर्षभर विशेष आयोजनों और छात्रवृत्तियों के साथ मनाई जाएगी। यह शाम गुरु-शिष्य परंपरा, प्रेम और संगीत साधना की अनंत धारा को समर्पित रही। जहां हर राग ने एक स्मृति को जीवंत किया और हर सुर ने एक श्रद्धांजलि दी। संवाद
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