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Delhi NCR News: तालकटोरा में सजी बदरिया में गूंजी कजरी-ठुमरी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
सावन-भादो की विदाई सोमवार को तालकटोरा स्टेडियम में लोकगीत, संगीत और नृत्य के रंगों के साथ हुई। दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित बदरिया-ए मॉनसून फेयरवेल फेस्टिवल में मानसून को भारतीय लोक परंपरा से जोड़ते हुए भोजपुरी, मैथिली और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई गई।
पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी की कजरी, ठुमरी और लोकधुनों ने शाम को खास बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सावन से जुड़े प्रेम, विरह और उल्लास को मंच पर जीवंत किया। कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, माता चकेरी देवी फाउंडेशन और दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सहयोग से हुए आयोजन में बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की लोक संस्कृति को प्रमुखता दी गई। लोकसंगीत और लोकनृत्य के साथ चित्रकला और वाद्य संगीत की प्रस्तुतियां भी हुईं। आयोजन का उद्देश्य दिल्ली में रहने वाले अलग-अलग भाषाई और क्षेत्रीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना रहा।
मानसून से जुड़ी भारतीय परंपरा की झलक पेश
बदरिया की अवधारणा भारतीय संस्कृति में मानसून के महत्व से जुड़ी है। कालिदास के मेघदूत से लेकर लोकगीतों तक बारिश को प्रेम, विरह, खुशी और सृजन से जोड़ा गया है। इसी भाव को केंद्र में रखकर सावन-भादो के गीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि बदरिया जैसे आयोजन दिल्लीवासियों को प्रकृति, कला और संस्कृति से जोड़ते हैं। कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि भोजपुरी, मैथिली और लोक परंपराओं को बड़े स्तर पर मंच देने का प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
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नई दिल्ली।
सावन-भादो की विदाई सोमवार को तालकटोरा स्टेडियम में लोकगीत, संगीत और नृत्य के रंगों के साथ हुई। दिल्ली सरकार की ओर से आयोजित बदरिया-ए मॉनसून फेयरवेल फेस्टिवल में मानसून को भारतीय लोक परंपरा से जोड़ते हुए भोजपुरी, मैथिली और पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत की झलक दिखाई गई।
पद्मश्री लोकगायिका मालिनी अवस्थी की कजरी, ठुमरी और लोकधुनों ने शाम को खास बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने सावन से जुड़े प्रेम, विरह और उल्लास को मंच पर जीवंत किया। कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, माता चकेरी देवी फाउंडेशन और दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सहयोग से हुए आयोजन में बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की लोक संस्कृति को प्रमुखता दी गई। लोकसंगीत और लोकनृत्य के साथ चित्रकला और वाद्य संगीत की प्रस्तुतियां भी हुईं। आयोजन का उद्देश्य दिल्ली में रहने वाले अलग-अलग भाषाई और क्षेत्रीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना रहा।
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मानसून से जुड़ी भारतीय परंपरा की झलक पेश
बदरिया की अवधारणा भारतीय संस्कृति में मानसून के महत्व से जुड़ी है। कालिदास के मेघदूत से लेकर लोकगीतों तक बारिश को प्रेम, विरह, खुशी और सृजन से जोड़ा गया है। इसी भाव को केंद्र में रखकर सावन-भादो के गीत और लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि बदरिया जैसे आयोजन दिल्लीवासियों को प्रकृति, कला और संस्कृति से जोड़ते हैं। कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि भोजपुरी, मैथिली और लोक परंपराओं को बड़े स्तर पर मंच देने का प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
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