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पूर्व जज राजिंदर सच्चर का 94 साल की उम्र में निधन, ऐसे हुई थी वकालत की शुरूआत
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 20 Apr 2018 02:54 PM IST
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rajinder sachar
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दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस और मुसलमानों की स्थिति सुधार को बनाई गई सच्चर कमेटी के अध्यक्ष राजिंदर सच्चर का आज निधन हो गया। 94 वर्ष की आयु में अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाले जस्टिस सच्चर का जन्म 22 दिसंबर 1923 को हुआ था।
-जस्टिस सच्चर ने मानवाधिकार को लेकर काफी काम किया।
-उन्होंने वकालत की शुरुआत 1952 में की।
-आठ साल बाद 8 दिसंबर 1960 से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की।
-12 फरवरी 1970 को वह दो साल के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के एडिशनल जज बनाए गए।
-फिर 5 जुलाई 1972 को दिल्ली हाईकोर्ट के जज नियुक्त किए गए।
-जस्टिस सच्चर दिल्ली हाईकोर्ट ही नहीं सिक्किम और राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टि भी रहे।
-सच्चर कमेटी के लिए हमेशा याद किए जाएंगे
सच्चर कमेटी
भारत सरकार ने 9 मार्च 2005 को देश के मुसलमानों की कथित सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई थी।
यह कमिटी मनमोहन सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में बनाई थी। इस कमेटी की 403 पेज की रिपोर्ट को 30 नवंबर, 2006 में लोकसभा में पेश किया गया था। इसी रिपोर्ट ने बताया कि देश में मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति व जनताति से भी बदतर है।
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-जस्टिस सच्चर ने मानवाधिकार को लेकर काफी काम किया।
-उन्होंने वकालत की शुरुआत 1952 में की।
-आठ साल बाद 8 दिसंबर 1960 से उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की।
-12 फरवरी 1970 को वह दो साल के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के एडिशनल जज बनाए गए।
-फिर 5 जुलाई 1972 को दिल्ली हाईकोर्ट के जज नियुक्त किए गए।
-जस्टिस सच्चर दिल्ली हाईकोर्ट ही नहीं सिक्किम और राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टि भी रहे।
-सच्चर कमेटी के लिए हमेशा याद किए जाएंगे
सच्चर कमेटी
भारत सरकार ने 9 मार्च 2005 को देश के मुसलमानों की कथित सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई थी।
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यह कमिटी मनमोहन सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजिंदर सच्चर की अध्यक्षता में बनाई थी। इस कमेटी की 403 पेज की रिपोर्ट को 30 नवंबर, 2006 में लोकसभा में पेश किया गया था। इसी रिपोर्ट ने बताया कि देश में मुसलमानों की स्थिति अनुसूचित जाति व जनताति से भी बदतर है।
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