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खास खबर : लॉकडाउन में नौकरी छूटी तो पैसे जोड़कर दुकान खोली, अब किराया भरना मुश्किल
Tue, 24 Nov 2020 06:51 AM IST
Vikas Kumar
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 24 Nov 2020 06:51 AM IST
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किराना स्टोर
- फोटो : amar ujala
कोविड-19 के कहर से हम सब किसी ना किसी तरह प्रभावित हैं। लेकिन पिछले दिनों लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी चली गई। इस बीच इनमें से कई लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए खुद की दुकान, रेस्तरां, पटरी दुकान खोलकर अपना व्यवसाय शुरू करने की कोशिश की है। लेकिन इतना सब कुछ करने के बावजूद कठिनाइयां इनका पीछा छोड़ने को राजी नहीं हैं। जिसके कारण इन लोगों को जीवन यापन करने के लिए विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे ही कई लोगों से बातचीत कर अमर उजाला ने उनका हाल जानने की कोशिश की है।
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कालकाजी में कपड़ों की दुकान चला रहे रवि चौधरी और उनकी पत्नी सुनीता दोनों लॉकडाउन से पहले नौकरी करते थे। रवि द्वारका स्थित लॉजिस्टिक कंपनी में काम करते थे। जहां उन्हें हर महीने 22 हजार रुपया वेतन मिलता था। लेकिन लॉकडाउन शुरू होते ही उनकी कंपनी ने उन्हें काम से निकाल दिया। पर सुनीता अभी भी एक स्पोर्ट्स के कपड़े बनाने वाली कंपनी में काम करती थीं। उन्हें वहां पर हर महीने 16 हजार रुपया वेतन मिलता था। सुनीता ने बताया कि करीब 2 महीने बाद उनकी कंपनी ने भी सभी कर्मियों को यह कहते हुए कंपनी बंद कर दी कि जब कारोबार शुरू होगा तो बुला लेंगे। हालांकि सुनीता और रवि ने अपना पीएफ का पैसा निकालकर 3 जून को अपनी दुकान शुरू की। उन्हें हर महीने 15 हजार रुपया दुकान का किराया भरना पड़ता है। सुनीता ने बताया कि वह इस समय किसी तरह अपने दो बच्चों और सास समेत कुल 5 लोगों का पेट भरने की कोशिश कर रही हैं।
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इसी तरह है अमित बजाज एक कारपोरेट लिमिटेड कंपनी में पिछले 12 सालों से फील्ड वर्क करते थे। वहां से उन्हें हर महीने 25 हजार रुपया वेतन मिलता था। अमित ने बताया कि लॉकडाउन शुरू होते ही कंपनी ने एक झटके में उन जैसे तमाम कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कई महीने तक वह घर पर बैठे रहे। आखिरकार उन्होंने कालकाजी डीडीए कॉलोनी के अंदर ही किराने की दुकान खोलने का निर्णय लिया। हर महीने उन्हें 14 हजार रुपया दुकान का किराया किराया भरना पड़ता है। बड़ी मुश्किल से वह एक बेटी, पत्नी सहित खुद का खर्च उठा पा रहे हैं।
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लक्ष्मी नगर के त्रिलोकी गुप्ता नोएडा की एक आईटी कंपनी में नौकरी करते थे। जहां उन्हें हर महीने 75 हजार रुपया वेतन मिलता था। अप्रैल में अचानक उनकी भी नौकरी चली गई। त्रिलोकी ने अपने बचत के पैसे लगाकर और कुछ पैसे पिता और दोस्तों से उधार लेकर लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन के सामने एक रेस्तरां खोला है। त्रिलोकी के अनुसार मौजूदा समय उनके सामने रेस्तरां को चलाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने बताया कि कारीगर मिल नहीं रहे हैं। ऊपर से कोरोना के मामले बढ़ने के कारण अब लोग बाहर खाने से भी बचने लगे हैं। रोजाना उन्हें लागत के पैसे कमाने में भी मशक्कत करनी पड़ रही है। ऐसे में बस समझ नहीं पा रहे हैं कि रेस्तरां चलाएं या इसे बंद कर फिर से नौकरी तलाश करें।