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गैर BJP दलों का साथ ताकि रहे लाल सलाम की गूंज

Sun, 14 Feb 2016 10:51 AM IST
Updated Sun, 14 Feb 2016 10:51 AM IST
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JNU dispute:  non-BJP parties with laal salam

लाल दुर्ग के नाम से पहचान रखने वाले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथियों के चार दशकों से जारी लाल सलाम की गूंज कम न होने देने के लिए गैर भाजपाई अन्य प्रमुख दलों का साथ मिल गया है।

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दरअसल, वामपंथियों के गढ़ में 14 वर्षों बाद एबीवीपी की संयुक्त सचिव पद जीतकर वापसी के बाद से लाल झंडे की जगह भगवा की मजबूती के लिए काम चल रहा है।

लाल दुर्ग का रंग बदलने की कोशिश के चलते ही वाम दलों को कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, जद यू का साथ मिल गया है। ऐसे में इस मुद्दे को अभी और राजनैतिक रंग देने की तैयारी हो गई है।

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एबीवीपी या एनसीयूआई को यहां यदा-कदा ही मौका मिला है

JNU dispute:  non-BJP parties with laal salam

वर्ष 1969 में स्थापित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में लाल झंडे के साथ ढपली की तान का पुराना रिश्ता है। एबीवीपी या एनसीयूआई को यहां यदा-कदा ही मौका मिला है।


पहली बार वर्ष 1991 में एबीवीपी के ब्रदीपाथ महापात्र संयुक्त सचिव बने, जबकि वर्ष 1996 में यहां भगवा ने कमाल कर तीनों सीटों पर कब्जा जमा लिया।

एबीवीपी के संदीप महापात्र वर्ष 1999-2000 में संयुक्त सचिव बने जबकि 2000-2001 में संदीप ने महज एक वोट से जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष पद जीता।  इसके बाद लाल दुर्ग में एबीवीपी के लिए सूखा रहा।

2013 व 2014 में भी अफजल का शहादत दिवस मनाया गया

JNU dispute:  non-BJP parties with laal salam

लाल दुर्ग में इस तरह की गतिविधियों को लेकर यह कोई नया विवाद नहीं है। गत वर्ष फूड फेस्टिवल में आजाद कश्मीर के नाम से स्टॉल लगा था तो विवाद हुआ, इसके बाद इस स्टॉल को हटवाया गया।


वर्ष 2013 व 2014 में भी अफजल का शहादत दिवस यहां पर मनाया गया। 2014 में यह गुपचुप हुआ लेकिन बताया जाता है कि उस समय पर भी हॉस्टल के कमरों से अफजल की फांसी के खिलाफ कई तरह के नारे लगाए गए थे।

एबीवीपी की वापसी के बाद इस बार अफजल की शहादत का मुद्दा गर्मा गया। सूत्र बताते हैं कार्यक्रम में इस बार क्या होगा इस पर एबीवीपी की पैनी नजर थी।

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कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद राजनैतिक दलों का मंथन शुरू हो गया

JNU dispute:  non-BJP parties with laal salam

वामपंथी दलों का आरोप है कि इसमें कुछ बाहरी छात्रों ने देशविरोधी नारे लगाए और एबीवीपी ने जेएनयू छात्र संगठन से जुड़े छात्र संगठनों के नेताओं को निशाना बना लिया। हालांकि आतंकी साबित हो चुके अफजल को फांसी दी जाए या नहीं इसको लेकर इन छात्र संगठनों का अलग ही मत है।


इस मामले में एबीवीपी का पलड़ा भारी रहने व एआईएसएफ संगठन से अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद राजनैतिक दलों का मंथन शुरू हो गया। इस समय चार पदों में दो अन्य पर आइसा व एक पर एबीवीपी का कब्जा है।

वामपंथी नेता डी राजा की पुत्री अपराजिता पर अफजल गुरु की शहादत मनाने के कार्यक्रम में नारेबाजी करने वाले छात्रों में शामिल होने का आरोप लगा। इसके बाद इसी विवि के एल्युमिनाई सीताराम येचुरी सहित अन्य वाम नेता हरकत में आ गए।

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