फिर हाईकोर्ट पहुंचा जेएनयू नारेबाजी विवाद, कन्हैया व अन्य सात पर आज होगी सुनवाई
जेएनयू का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया। अदालत ने जेएनयू प्रसाशन को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराए गए छात्र उमर खालिद व अनिर्बान भट्टाचार्य के खिलाफ अगले आदेश तक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।
वहीं, पूर्व अध्यक्ष कन्हैया व सात अन्य छात्रों की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होगी। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने यह आदेश उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य की उस याचिका पर दिया है, जिसमें जेएनयू में 9 फरवरी के नारेबाजी मामले में अपील अथॉरिटी के निर्णय को चुनौती दी गई है।
संबंधित अथॉरिटी ने जेएनयू प्रशासन के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 19 को अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराते हुए उनके निलंबन की सजा को बहाल रखा है। उमर व अनिर्बान भी इन छात्रों में शामिल हैं।
दूसरी तरफ इसी मामले से संबंधित घटनाक्रम में कन्हैया और सात अन्य छात्रों ने भी न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ के समक्ष याचिका पाकर तुरंत सुनवाई का आग्रह किया।
अनुशासनहीनता के आरोप में दोषी ठहराने के निर्णय को दी है चुनौती
खंडपीठ ने इनकी सभी की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई तय कर दी। उधर, उमर खालिद और भट्टाचार्य के अधिवक्ता ने न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा को बताया कि अपीलीय अथॉरिटी द्वारा 22 अगस्त को दिया आदेश मंगलवार से प्रभावी हो जाएगा।
ऐसे में उस पर रोक लगाई जाए। दोनों छात्रों के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि जेएनयू के कुलपति की अपील अथॉरिटी ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था लेकिन जो मुद्दे उन्होंने उठाए उन पर विचार ही नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय एकतरफ है।
अदालत ने उन्हें समय प्रदान करते हुए कहा कि अगले आदेश तक जेएनयू प्रशासन छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा। अदालत ने मामले की सुनवाई 8 सितंबर तय की है। मई में भी हाईकोर्ट ने छात्रों की याचिका पर अपील अथॉरिटी के निर्णय तक इन छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।