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जियो इंस्टीट्यूट: इंपावर्ड एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में अपलोड, विरोध में प्रदर्शन

Thu, 12 Jul 2018 09:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 12 Jul 2018 09:58 AM IST
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jio institute eminence award controversy, empowered expert committee brings report in public domain
अवार्ड पर सरकार ने दी सफाई - फोटो : अमर उजाला

जियो इंस्टीट्यूट का इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस में चयन पर उठे विवाद के बीच यूजीसी ने इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस सलेक्शन रिपोर्ट पब्लिक डोमेन पर अपलोड कर दी है। इंपावर्ड एक्सपर्ट कमेटी ने किस प्रकार इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के लिए संस्थानों का चयन किया इसकी जानकारी रिपोर्ट शामिल है।

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यूजीसी ने बुधवार को पब्लिक डोमेन में जो एंपावर्ड एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट अपलोड की है, उसमें जियो से लेकर अन्य संस्थानों पर उठ रहे सवालों के जवाब दिए गए हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के स्टेट्स के लिए कुल 114 संस्थानों ने आवेदन किया था।
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संस्थानों के चयन के दौरान उनके अकेडमिक काम की भी जांच की गई। इन आवेदनों में पांच सौ साल से पुरानी यूनिवर्सिटी भी शामिल थी।

चयन प्रक्रिया में सरकारी संस्थानों में आईआईएससी बंगलूरू, आईआईटी मद्रास, डीयू, जादवपुर, आईआईटी खड्गपुर अन्ना यूनिवर्सिटी,  आईआईटी मुंबई शार्टलिस्ट हुई थी। जबकि निजी में सिर्फ तीन ही नाम थे। जियो इंस्टीट्यूट का चयन किस आधार पर किया गया, उसके बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गयी है।

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जियो इंस्टीट्यूट चयन के खिलाफ प्रदर्शन

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इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस में ग्रीनफील्ड कैटेगिरी के तहत रिलायंस फाउंडेशन के जियो इंस्टीट्यूट के चयन का छात्र संगठनों ने भी विरोध शुरू कर दिया है।

शास्त्री भवन स्थित मानव संसाधन विकास मंत्रालय के बाहर बुधवार को एनएसयूआई और एआईएसएफ के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रिलायंस को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।

एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान का कहना था कि इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के तहत जियो इंस्टीट्यूट का चयन कर लिया गया, जबकि संस्थान अभी सिर्फ कागजों में हैं। इसके चयन के आधार की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

उधर, एआईएसएफ के महासचिव  विश्वजीत कुमार ने कहा कि सरकार जियो इंस्टीट्यूट को इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के नाम पर सुविधाएं मुहैया कराएगी, जो गलत है। मोदी सरकार ने रिलायंस को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी संस्थानों को पीछे धकेला है। प्रदर्शनकारी सरकार के विरोध वाली पट्टियां भी लिए थे।

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