जेवर एयरपोर्ट: अब नहीं ली जाएगी इन दो गांवों की जमीन
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जेवर में प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए अब सिर्फ 6 गांवों की 1334 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी। दो गांव मुकीमपुर सिवारा व रामनेर अधिग्रहण से बाहर हो गए हैं। बनवारी वास की भी जमीन न लेने पर जल्द निर्णय हो सकता है।
एसआईए (सोशल इंपैक्ट असेस्मेंट) के मूल्यांकन के लिए प्रदेश सरकार की तरफ से गठित विशेषज्ञ समूह की हाल ही में जीबीयू में बैठक हुई, जिसमें तय किया गया कि एयरपोर्ट के प्रथम चरण के लिए मुकीमपुर सिवारा व रामनेर गांव की जमीन लेने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार ने एसआईए के लिए विशेषज्ञ समूह का गठन ही इसलिए किया है ताकि एयरपोर्ट के लिए कम से कम जमीन ली जाएगी और कम से कम घरों का विस्थापन होगा। इन दोनों गांवों में 107 हेक्टेयर जमीन ली जानी थी।
मुकीमपुर सिवारा में 452 घरों का विस्थापन होना था, लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। अब इन 6 गांवों से कुल 1905 घरों को विस्थापित करने की जरूरत पड़ेगी। पहले यह संख्या 3500 से अधिक थी। विशेषज्ञ समूह ने यह भी संकेत दिया है कि बनवारी वास भी एयरपोर्ट के प्रथम चरण की जमीन अधिग्रहण से बाहर हो सकता है। अब मुख्य रूप से दयानतपुर (423 हेक्टेयर), रोही-पारोही (470 हेक्टेयर) व रन्हेरा (128 हेक्टेयर) में सबसे अधिक जमीन ली जानी है। प्रथम चरण में 116 हेक्टेयर ग्राम समाज की जमीन भी शामिल है।
2015 में शहरी क्षेत्र में आ गए थे ये दो गांव
एयरपोर्ट बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित करने से पहले प्रथम चरण के गांवों को शहरी क्षेत्र में घोषित करने का विरोध हो रहा है। शहरी क्षेत्र घोषित होने से किसानों को सर्किल रेट को दोगुना मुआवजा ही मिल पा रहा है। इस बीच यह तथ्य सामने आया है, कि 15 दिसंबर 2015 को तत्कालीन अखिलेश सरकार ने दयानतपुर व रन्हेरा गांव को यमुना प्राधिकरण के अधिसूचित शहरी एरिया में शामिल कर दिया था। तब से ये गांव शहरी क्षेत्र में ही घोषित हैं।
सूत्रों ने बताया कि उस समय कुल 80 गांवों के नामों की सूची जारी की गई थी, जबकि इन दोनों गांवों की जमीन प्रस्तावित हवाई पट्टी के सबसे करीब है। बता दें, कि हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शहरी क्षेत्र घोषित कर दोगुना मुआवजा देने के मसले पर ट्वीट कर सवाल उठाते हुए कहा है कि ‘जेवर एयरपोर्ट के नाम पर सरकार किसानों-ग्रामीणों को कानूनी कागजी बातों का झांसा देकर उनकी जमीन एक तो बिना उनकी मर्जी के और भी औने-पौने दाम पर हड़प लेना चाहती है। इससे किसान-गरीबों का विरोध इतना बढ़ेगा कि अगले चुनाव में अमीरों की हितैषी भाजपा खुद अपनी ही जमीन खो बैठेगी।’