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जेईई एडवांस 2017: मेन्स के बाद एडवांस में भी दिल्ली के अनन्य बने ऑल इंडिया थर्ड टॉपर

Mon, 12 Jun 2017 09:48 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 12 Jun 2017 09:48 AM IST
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JEE advanced result 2017, all india third topper delhis ananya agarwal, all about him
जेईई एडवांस में ऑल इंड‌िया थर्ड टॉपर अनन्य अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला

देशभर के इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित जेईई एडवांस परीक्षा 2017 का रिजल्ट सीबीएसई ने रविवार(11 जून) को जारी कर दिया है। जेईई एडवांस परीक्षा में पंचकुला के सर्वेश महतानी ने 366 में से 339 स्कोर लेकर देशभर में टॉप किया है।

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जेईई एडवांस में पुणे के अक्षत चुग ने जहां दूसरी रैंक हासिल की, तो दिल्ली के अनन्य अग्रवाल ने तीसरा स्थान हासिल किया। बता दें कि अनन्य जेईई मेन्स परीक्षा में भी तीसरे स्थान पर ही थे।
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अनन्य ने बताया, 'मुझे बचपन से ही कंप्यूटर बेहद पसंद था और बड़ा होकर कंप्यूटर इंजीनियर ही बनना चाहता था। घर में मम्मी-पापा सब मेडिकल की बातें करते थे, तो मैं इंजीनियरिंग की। ऑल इंडिया में तीसरा रैंक मिलेगा, ऐसा सोचा तो नहीं था, लेकिन यह भरोसा जरूर था कि टॉप दस में शामिल तो होना ही है।'
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होप हॉल फाउंडेशन स्कूल में बारहवीं कक्षा के छात्र अनन्य अग्रवाल के पिता डॉ. रमेश अग्रवाल एम्स में पिडियोट्रिक डिपार्टमेंट में बच्चों के रोग के विशेषज्ञ हैं। जबकि मां डॉ. कृष्णा अग्रवाल मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेस में दंत चिकित्सक हैं।

घर में था डॉक्टरी का माहौल पर अनन्य की सोच थी अलग

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अनन्य के माता-पिता दोनों डॉक्टर होने के चलते घर का माहौल मेडिकल साइंस से जुड़ी जानकारियों को साझा करता था। हालांकि, अनन्य इससे उलट मेडिकल क्षेत्र में इंजीनियरिंग को शामिल करने से किस प्रकार तकनीक विकसित करके नए व सस्ते उपकरणों से आम आदमी को सस्ते में बीमारियों के बोझ से छुटकारा दिलाया जा सके, पर जोर देते थे।

अनन्य के पिता डॉ. रमेश कहते हैं कि हमने कभी उसे मेडिकल प्रोफेशन में लाने पर जोर नहीं दिया। बचपन से उसे उसकी रूचियों के आधार पर छोड़ दिया था, ताकि बड़े होकर उसे जो क्षेत्र पसंद हो, उसे अपना सके।

बचपन से ही उसे तकनीक और प्रौद्योगिकी से जुड़ी जानकारियों में बेहद रूचि होती थी। इसलिए हम उसे उन्हीं विषयों पर आधारित किताबें लेकर देते थे। अनन्य को कंप्यूटर के साथ तकनीक पर काम करने के साथ किताब पढना भी बेहद पसंद है। इसके अलावा पर्यावरण के प्रति भी बेहद जागरूक हैं।

अनन्य कहते हैं कि मैं रोज आठ से दस घंटे पढ़ता था। कोचिंग के साथ-साथ स्कूल में भी क्लास लगाता था। स्कूल से लेकर कोचिंग तक शिक्षक द्वारा जो छोटी-छोटी जानकारियां दी जाती थीं, उन्हें नोट करते हुए घर जाकर दोहराता रहता था। यदि परीक्षा में पास होना है तो उन्हीं जानकारियों को याद रखना होगा। आईआईटी मुंबई में कंप्यूटर साइंस इंजीनियिरिंग में दाखिला लेने का सपना है।

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