{"_id":"6a11bca93e901071cf0720f4","slug":"jamia-nagar-riots-case-rouse-avenue-court-acquits-12-accused-delhi-ncr-news-c-340-1-del1004-137627-2026-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"जामिया नगर दंगा केस: राउज एवेन्यू कोर्ट ने 12 आरोपियों को किया बरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जामिया नगर दंगा केस: राउज एवेन्यू कोर्ट ने 12 आरोपियों को किया बरी
विज्ञापन
-कोर्ट ने 13 आरोपियों पर आरोप तय करने के दिए आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2007 के जामिया नगर दंगा मामले में 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। वहीं, 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ दंगा, आगजनी, डकैती, हत्या के प्रयास और सरकारी कर्मचारियों पर हमला समेत विभिन्न धाराओं में आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। साथ ही, अदालत ने अपने फैसले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच में आरोपियों की पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) नहीं कराई गई, जबकि यह बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया थी। अदालत ने कहा कि इससे आरोपियों की पहचान की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई गिरफ्तारियां संदिग्ध परिस्थितियों में की गईं और जांच में स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, केवल पुलिस गवाहों के आधार पर बड़ी संख्या में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 सितंबर 2007 को करीब 1,500 लोगों की भीड़ ने जामिया नगर पुलिस चौकी पर हमला कर दिया था। आरोप है कि भीड़ ने चौकी में आग लगा दी, कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। अदालत ने कहा कि 12 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें आरोपमुक्त किया जाता है। वहीं, प्राथमिकी में नामजद और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से जुड़े 13 आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाए गए हैं। इनके खिलाफ गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, आगजनी, डकैती, हत्या के प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित अन्य धाराओं में आरोप तय किए जाएंगे। मामले में आगे की सुनवाई आरोप तय होने के बाद की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2007 के जामिया नगर दंगा मामले में 12 आरोपियों को बरी कर दिया है। वहीं, 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ दंगा, आगजनी, डकैती, हत्या के प्रयास और सरकारी कर्मचारियों पर हमला समेत विभिन्न धाराओं में आरोप तय करने के आदेश दिए हैं। साथ ही, अदालत ने अपने फैसले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच में आरोपियों की पहचान के लिए टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) नहीं कराई गई, जबकि यह बेहद महत्वपूर्ण प्रक्रिया थी। अदालत ने कहा कि इससे आरोपियों की पहचान की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई गिरफ्तारियां संदिग्ध परिस्थितियों में की गईं और जांच में स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, केवल पुलिस गवाहों के आधार पर बड़ी संख्या में आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी को पूरी तरह विश्वसनीय नहीं माना जा सकता।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 22 सितंबर 2007 को करीब 1,500 लोगों की भीड़ ने जामिया नगर पुलिस चौकी पर हमला कर दिया था। आरोप है कि भीड़ ने चौकी में आग लगा दी, कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया और पुलिसकर्मियों पर हमला किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। अदालत ने कहा कि 12 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए उन्हें आरोपमुक्त किया जाता है। वहीं, प्राथमिकी में नामजद और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से जुड़े 13 आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाए गए हैं। इनके खिलाफ गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, आगजनी, डकैती, हत्या के प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने सहित अन्य धाराओं में आरोप तय किए जाएंगे। मामले में आगे की सुनवाई आरोप तय होने के बाद की जाएगी।
विज्ञापन