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Delhi NCR News: 1984 दंगा मामले में आरोपी जगदीश टाइटलर को पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए दी एनओसी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। 1984 के सिख-विरोधी दंगा मामले में आरोपी कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण (रिन्यूअल) के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी करने की अनुमति दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि टाइटलर बिना पूर्व अनुमति के विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि टाइटलर ट्रायल के दौरान नियमित रूप से अदालत में पेश हो रहे हैं और रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने अदालत द्वारा लगाई गई किसी शर्त का उल्लंघन किया हो।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा जताई गई आशंका को रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों से बल नहीं मिलता कि पासपोर्ट मिलने के बाद आरोपी फरार हो सकते हैं या न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें 10 वर्ष की अवधि के लिए नया पासपोर्ट जारी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह निर्णय पासपोर्ट जारी करने वाली प्राधिकरण के लिए कोई निर्देश नहीं है। अदालत ने कहा कि उसका आदेश केवल नो ऑब्जेक्शन तक सीमित है और पासपोर्ट जारी करने का अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा लागू नियमों एवं कानूनी प्रावधानों के तहत लिया जाएगा।
अदालत ने टाइटलर को निर्देश दिया कि नया पासपोर्ट जारी होने के एक सप्ताह के भीतर उसकी प्रति अदालत में जमा करानी होगी। साथ ही, यह शर्त भी लगाई गई कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर यात्रा नहीं करेंगे।
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नई दिल्ली। 1984 के सिख-विरोधी दंगा मामले में आरोपी कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को राउज एवेन्यू कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण (रिन्यूअल) के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी करने की अनुमति दी है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि टाइटलर बिना पूर्व अनुमति के विदेश यात्रा नहीं कर सकेंगे। विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा कि टाइटलर ट्रायल के दौरान नियमित रूप से अदालत में पेश हो रहे हैं और रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने अदालत द्वारा लगाई गई किसी शर्त का उल्लंघन किया हो।
अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी द्वारा जताई गई आशंका को रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों से बल नहीं मिलता कि पासपोर्ट मिलने के बाद आरोपी फरार हो सकते हैं या न्यायिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने उन्हें 10 वर्ष की अवधि के लिए नया पासपोर्ट जारी किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं होने की बात कही। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह निर्णय पासपोर्ट जारी करने वाली प्राधिकरण के लिए कोई निर्देश नहीं है। अदालत ने कहा कि उसका आदेश केवल नो ऑब्जेक्शन तक सीमित है और पासपोर्ट जारी करने का अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा लागू नियमों एवं कानूनी प्रावधानों के तहत लिया जाएगा।
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अदालत ने टाइटलर को निर्देश दिया कि नया पासपोर्ट जारी होने के एक सप्ताह के भीतर उसकी प्रति अदालत में जमा करानी होगी। साथ ही, यह शर्त भी लगाई गई कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर यात्रा नहीं करेंगे।
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