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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के न्यायाधीश संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं या नहीं

Tue, 03 Jan 2017 09:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 03 Jan 2017 09:39 AM IST
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J & K High Court judge take an oath of allegiance to the Constitution or not
द‌िल्ली उच्च न्यायालय

क्या संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत राष्ट्रपति के आदेश के बिना जम्मू-कश्मीर में कोई संवैधानिक संशोधन लागू होता है या नहीं। क्या न्यायाधीशों के लिए वहां संविधान का क्रियान्वयन अनिवार्य है या नहीं।

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क्या जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के न्यायाधीश संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं या नहीं। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से जवाब मांगा है।

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मुख्य  न्यायाधीश जस्टिस जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि फिलहाल वे इस मामले में गुणदोष में जाए बिना सुनवाई करेंगी।

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खंडपीठ ने यह आदेश उस समय दिया जब याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि जम्मू कश्मीर में हाईकोर्ट के न्यायाधीश भारतीय संविधान को लागू करने के लिए बाध्य नहीं हैं।

सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख तय की

J & K High Court judge take an oath of allegiance to the Constitution or not
court shimla

खंडपीठ ने कहा कि पहली नजर में उसका मानना है कि फोरम कनवीनियेंस के सिद्धांत को देखते हुए याचिकाकर्ता के लिए जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट से गुहार लगाना उचित होगा।

 

खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई के लिए 13 फरवरी की तारीख तय करते हुए याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि ऐसा लगता है कि जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भारत के संविधान को लागू करने के लिए निष्ठा की शपथ नहीं लेते हैं। हम इस मुद्दे पर केंद्र और जम्मू कश्मीर राज्य का पक्ष सुनना चाहते हैं।
 

मालूम हो कि याची वकील सुरजीत सिंह ने संविधान आदेश 1954 को चुनौती दी है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 368 के एक प्रावधान को जोड़ा गया है। प्रावधान में कहा गया है कि ऐसा कोई भी संशोधन जम्मू- कश्मीर राज्य के मामले में उस समय तक प्रभावी नहीं होगा जब तब अनुच्छेद 370 के उपबंध (1) के तहत राष्ट्रपति के आदेश से लागू नहीं किया जाए।

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