फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   "It was not a shock at the Amarnath Yatra, thought would not return alive '

सहमे हुए अमरनाथ यात्रियों ने बताया, 'कश्मीर में किस कदर खतरनाक हैं हालात'

Wed, 13 Jul 2016 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Wed, 13 Jul 2016 11:54 AM IST
विज्ञापन
"It was not a shock at the Amarnath Yatra, thought would not return alive '
अमरनाथ यात्रा - फोटो : PTI

मेरे लिए इस बार की अमरनाथ यात्रा किसी सदमे से कम नहीं थी। न खाने की सुविधा न ठहरने की। न प्रशासन की तरफ से और न श्राइन बोर्ड की ओर से कोई सहायता मिली। 

विज्ञापन


सिर्फ सेना की मदद से सुरक्षित घर लौटे हैं। अमरनाथ यात्रा से सोमवार को घर लौटे ग्रेटर नोएडा अल्फा वन के निवासी मनेंद्र सिंह पंवार ने यात्रा वृत्तांत कुछ इस तरह से बयां किया। 
विज्ञापन


मनिंदर सिंह बताते हैं कि मैं अपने छोटे भाई किशन के साथ आठ जुलाई को सुबह 10 बजे की फ्लाइट से दिल्ली से श्रीनगर के लिए निकला था। उसी दिन आतंकी बुरहान मारा गया था।  शाम होने तक श्रीनगर में कर्फ्यू लगा दिया गया। पोस्टपेड मोबाइल भी बंद कर दिए गए। फिर भी नौ जुलाई को किसी तरह अमरनाथ पहुंचे और दर्शन किया। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उस वक्त तक श्रीनगर में बवाल काफी बढ़ गया था। वहां से आने के रास्ते को बंद कर दिया गया था। हम लोग बालटाल स्थित एक होटल पहुंचे। वहां की लाइट बंद कर दी गई। होटल वाले ने जनरेटर चलाने से भी मना कर दिया। किसी तरह रात बिताई। 

एक कप चाय की कीमत 60 रुपये

"It was not a shock at the Amarnath Yatra, thought would not return alive '
amarnath yatra - फोटो : Amar Ujala

10 जुलाई को देर रात हम लोग वहां से घर वापसी के लिए निकले। रास्ते में पत्थरबाजी होती रही। हमारी टैक्सी पर भी पत्थर लगे। कार के शीशे टूट गए। उसके कांच से मेरे हाथ पर जख्म भी हुआ। 

इसके बाद फिर सोनमर्ग में रोक दिया गया। कर्फ्यू के बावजूद आर्मी वालों ने थोड़े-थोड़े समय पर ढील देकर यात्रियों को आगे भेज रहे थे। रात करीब ढाई बजे हम दोनों एयरपोर्ट पहुंच गए। 

एयरपोर्ट के बाहर चार से पांच हजार यात्री जमीन पर लेटे हुए थे। वहां कोई सरकारी मदद नहीं मिल रही थी। यहां तक कि पानी का भी इंतजाम नहीं था। चाय 60 रुपये की एक कप मिल रही थी। 

खाने की कोई व्यवस्था नहीं। बड़ी मुश्किल से 11 जुलाई को दोपहर में हमें फ्लाइट मिली और दिल्ली वापस पहुंचे, तब जाकर जान में जान आई। यह हमारे लिए कभी न भूलने वाला सफर रहा।  

'एक बार तो लगा जिंदा वापस नहीं लौटेंगे'

"It was not a shock at the Amarnath Yatra, thought would not return alive '
amarnath yatra - फोटो : Amar Ujala

ग्रेटर नोएडा की एडब्ल्यूएचओ सोसायटी में रहने वाले प्रो. कोटि रेड्डी, शैलेंद्र सिंह, प्रो. थिरुनावाकारसु, सुबेश सिंह, ईश्वर लिंगम और एस वेंकटेशन की टीम भी बाबा अमरनाथ के दर्शन के बाद आठ जुलाई को श्रीनगर लौट रहे थे। 

वहां उपद्रवी खूब पथराव कर रहे थे। सड़कों पर गाड़ियों के शीशे टूटे पड़े थे। लोग सुरक्षा की गुहार लगाते रहते, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। उनकी गाड़ी पर भी भीड़ ने पथराव किए। 

एक बार तो लगा कि शायद जिंदा वापस लौट पाना मुश्किल हो जाएगा। किसी तरह डल गेट तक पहुंचे। वहां एक होटल में ठहरे, लेकिन यहां भी देर रात कुछ लोग देश विरोधी नारे लगाते हुए पहुंच गए।

गेट खुलवाने की कोशिश करने लगे। हम लोग बहुत डरे हुए थे। गेट नहीं खोला। किसी तरह उपद्रव शांत होने का इंतजार करते रहे। डल गेट से श्रीनगर की दूरी करीब 10 किलोमीटर है। फिर भी टैक्सी वाले ने चार हजार रुपये ले लिए। 11 जुलाई को श्रीनगर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से फ्लाइट में बैठने के बाद जान में जान आई। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed