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सामाजिक सरोकार न बिगड़े, यह हमारी जिम्मेदारी : प्रो. योगेश सिंह
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- डीयू का पहला साहित्य महोत्सव संपन्न, सामाजिक सौहार्द बनाने का लिया संकल्प
- राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने युवाओं को कहा प्रेम का ब्रेकअप नहीं हो सकता, जो ब्रेकअप हो वह प्रेम नहीं हो सकता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। किसी भी तरीके से सामाजिक सरोकार न बिगड़े। हम सब इस देश की एकता के लिए काम करें यह हमारी जिम्मेदारी है। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने यह बातें डीयू में पहली बार आयोजित साहित्य महोत्सव के समापन समारोह में कही। उन्होंने उपस्थित लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरा साहित्य महोत्सव इससे भी अच्छा और प्रभावी होगा।
डीयू में तीन दिवसीय साहित्य महोत्सव शनिवार को संपन्न हो गया। इसमें डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। कुलपति ने साहित्य महोत्सव के ध्येय वाक्य राष्ट्र प्रथम अनेकता में एकता पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके भाव को भी समझना जरूरी है।
कार्यक्रम में डीयू कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि अलग अलग विषयों पर कुल 28 सत्रों का आयोजन हुआ। साहित्य महोत्सव के कनवीनर और डीयू कल्चर काउंसिल के चेयर पर्सन अनूप लाठर ने महोत्सव की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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महोत्सव के अंतिम दिन संवाद सत्र में राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी छात्रों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि विज्ञान, समाज और सभी तरह की चीजें साहित्य में समाहित हैं। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि पर पूछे सवाल पर उन्होंने कहा कि साइंस यह सिखाती है कि दुनिया में पहचान आपको उस चीज से मिलती है जो आप रिफ्लेक्ट करके दूसरों को देते हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा की चीजों को भारतीय दृष्टि से देखना चाहिए। एआई को लेकर कहा कि यह भावनाएं व रस उत्पन्न नहीं करता केवल ड्राफ्ट कर सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि प्रेम का ब्रेकअप नहीं हो सकता और जो ब्रेकअप हो वह प्रेम नहीं हो सकता।
एक अन्य संवाद सत्र में रेसलर और अभिनेता संग्राम सिंह ने फिट इंडिया विषय पर बात की। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपनी जिंदगी में थोड़े पागल बनो अपने सपनों को साकार करने के लिए ज्यादा समझदार होना भी ठीक नहीं। अंतिम दिन अन्य कई वक्ताओं ने भी छात्रों को संदेश दिए। साहित्यिक महोत्सव में कालचक्र सिविलाइजेशनल डायलॉग सत्र में लेखक नीलेश कुलकर्णी ने कहा कि कालचक्र केवल समय का प्रवाह नहीं, बल्कि विचारों, परंपराओं और अनुभवों की सतत यात्रा है।
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- राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने युवाओं को कहा प्रेम का ब्रेकअप नहीं हो सकता, जो ब्रेकअप हो वह प्रेम नहीं हो सकता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। किसी भी तरीके से सामाजिक सरोकार न बिगड़े। हम सब इस देश की एकता के लिए काम करें यह हमारी जिम्मेदारी है। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने यह बातें डीयू में पहली बार आयोजित साहित्य महोत्सव के समापन समारोह में कही। उन्होंने उपस्थित लोगों से सामाजिक सौहार्द बनाने का संकल्प लेने को कहा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दूसरा साहित्य महोत्सव इससे भी अच्छा और प्रभावी होगा।
डीयू में तीन दिवसीय साहित्य महोत्सव शनिवार को संपन्न हो गया। इसमें डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। कुलपति ने साहित्य महोत्सव के ध्येय वाक्य राष्ट्र प्रथम अनेकता में एकता पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके भाव को भी समझना जरूरी है।
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कार्यक्रम में डीयू कुलसचिव डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि अलग अलग विषयों पर कुल 28 सत्रों का आयोजन हुआ। साहित्य महोत्सव के कनवीनर और डीयू कल्चर काउंसिल के चेयर पर्सन अनूप लाठर ने महोत्सव की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।
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महोत्सव के अंतिम दिन संवाद सत्र में राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी छात्रों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि विज्ञान, समाज और सभी तरह की चीजें साहित्य में समाहित हैं। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि पर पूछे सवाल पर उन्होंने कहा कि साइंस यह सिखाती है कि दुनिया में पहचान आपको उस चीज से मिलती है जो आप रिफ्लेक्ट करके दूसरों को देते हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा की चीजों को भारतीय दृष्टि से देखना चाहिए। एआई को लेकर कहा कि यह भावनाएं व रस उत्पन्न नहीं करता केवल ड्राफ्ट कर सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि प्रेम का ब्रेकअप नहीं हो सकता और जो ब्रेकअप हो वह प्रेम नहीं हो सकता।
एक अन्य संवाद सत्र में रेसलर और अभिनेता संग्राम सिंह ने फिट इंडिया विषय पर बात की। उन्होंने छात्रों से कहा कि अपनी जिंदगी में थोड़े पागल बनो अपने सपनों को साकार करने के लिए ज्यादा समझदार होना भी ठीक नहीं। अंतिम दिन अन्य कई वक्ताओं ने भी छात्रों को संदेश दिए। साहित्यिक महोत्सव में कालचक्र सिविलाइजेशनल डायलॉग सत्र में लेखक नीलेश कुलकर्णी ने कहा कि कालचक्र केवल समय का प्रवाह नहीं, बल्कि विचारों, परंपराओं और अनुभवों की सतत यात्रा है।