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नौ साल पहले चुनी आतंक की राह: नए लोगों को भी कर रहा था भर्ती, पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के लिए करता था काम
Sat, 10 Aug 2024 08:36 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 10 Aug 2024 08:36 AM IST
सार
स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली पुलिस ने आतंकी घटना को अंजाम देने के इरादे से दिल्ली के वीवीआईपी इलाकों की रेकी करने वाले आईएसआईएस आतंकी रिजवान अली को गिरफ्तार किया है। रिजवान ने नौ साल पहले आतंक की राह चुनी थी। रिजवान ने सोशल मीडिया के जरिये हैंडलरों से जुड़ा था।
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ISIS terrorist Rizwan Ali
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को आतंकी रिजवान अली की तलाश बीते साल अक्तूबर से थी। उसके तीन साथियों मोहम्मद अरशद वारसी, मोहम्मद रिजवान और इंजीनियर शाहनवाज उर्फ शैफी उज्जमा को गिरफ्तार किया था, लेकिन रिजवान फरार चल रहा था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि 2015 में रिजवान सोशल मीडिया के जरिये कट्टरपंथी विचारधारा की ओर झुका।
2017 में उसकी मुलाकात दिल्ली के शाहीन बाग में पढ़ाई के लिए आए झारखंड के मूल निवासी आतंकी शाहनवाज से हुई और वे अच्छे दोस्त बन गए। शाहनवाज और रिजवान हिजरत करना चाहते थे। इसके लिए धन इकट्ठा करने के लिए शाहनवाज अपराध में शामिल हो गया।
वर्ष 2018 में रिजवान एक सोशल मीडिया एप्लीकेशन के जरिये आईएसआईएस हैंडलर से जुड़ा। तब से वह और उसके साथी आईएसआईएस की विचारधारा में गहराई से शामिल हो गए और आतंकी वारदात को अंजाम देने की साजिश और तैयारी कर रहे थे।
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अप्रैल 2022 में रिजवान और शाहनवाज इमरान, यूनुस साकी (पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार) के संपर्क में आए। हालांकि शाहनवाज को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन रिजवान जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपना ठिकाना बदलता रहा।
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2017 में उसकी मुलाकात दिल्ली के शाहीन बाग में पढ़ाई के लिए आए झारखंड के मूल निवासी आतंकी शाहनवाज से हुई और वे अच्छे दोस्त बन गए। शाहनवाज और रिजवान हिजरत करना चाहते थे। इसके लिए धन इकट्ठा करने के लिए शाहनवाज अपराध में शामिल हो गया।
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वर्ष 2018 में रिजवान एक सोशल मीडिया एप्लीकेशन के जरिये आईएसआईएस हैंडलर से जुड़ा। तब से वह और उसके साथी आईएसआईएस की विचारधारा में गहराई से शामिल हो गए और आतंकी वारदात को अंजाम देने की साजिश और तैयारी कर रहे थे।
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अप्रैल 2022 में रिजवान और शाहनवाज इमरान, यूनुस साकी (पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार) के संपर्क में आए। हालांकि शाहनवाज को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन रिजवान जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपना ठिकाना बदलता रहा।
वर्ष 2018 में रिजवान एक सोशल मीडिया एप्लीकेशन के जरिये आईएसआईएस हैंडलर से जुड़ा। तब से वह और उसके साथी आईएसआईएस की विचारधारा में गहराई से शामिल हो गए और आतंकी वारदात को अंजाम देने की साजिश और तैयारी कर रहे थे।
अप्रैल 2022 में रिजवान और शाहनवाज इमरान, यूनुस साकी (पुणे पुलिस द्वारा गिरफ्तार) के संपर्क में आए। हालांकि शाहनवाज को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन रिजवान जांच एजेंसियों से बचने के लिए अपना ठिकाना बदलता रहा।
नए लोगों को भर्ती भी कर रहा था
सूत्रों ने बताया कि रिजवान अली फरार रहने के दौरान स्लीपर सेल बनकर मुस्लिम युवाओं का ब्रेनवाश कर उन्हें जेहादी बनाने व आईएसआईएस के लिए भर्ती करने में जुटा हुआ था। बताया जा रहा है कि वह वर्ष 2002 में गुजरात के गांधी नगर स्थित अक्षरधाम मंदिर में हमला करने के मास्टरमाइंड फरहतुल्ला गौरी और उसके दामाद शाहिद फैसल के संपर्क में था।
सूत्रों ने बताया कि रिजवान अली फरार रहने के दौरान स्लीपर सेल बनकर मुस्लिम युवाओं का ब्रेनवाश कर उन्हें जेहादी बनाने व आईएसआईएस के लिए भर्ती करने में जुटा हुआ था। बताया जा रहा है कि वह वर्ष 2002 में गुजरात के गांधी नगर स्थित अक्षरधाम मंदिर में हमला करने के मास्टरमाइंड फरहतुल्ला गौरी और उसके दामाद शाहिद फैसल के संपर्क में था।
यह दोनों आतंकी गतिविधियों को अंजाम देेने के लिए पुणे माॅड्यूल के सदस्यों को निर्देश दे रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि यह दोनों आतंकी आईएसआई के लिए काम करते हुए पाकिस्तान में छिपे हुए हैं और आईएसआई के इशारे पर भारत में कट्टरपंथी नेटवर्क स्थापित करने के लिए युवाओं को भर्ती करने के साथ ही बम बनाने और उसे ब्लास्ट करने की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं।
कई जगह पर की है रेकी
अधिकारियों ने बताया कि पुणे माॅड्यूल के सदस्यों ने कट्टरपंथी नेटवर्क बनाने के लिए देशभर कई जगहों पर रेकी की थी, पश्चिमी घाट क्षेत्र के पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्रों में कई सप्ताह तक रहे। यह यहां पर ट्रेनिंग सेंटर खोलना चाहते थे। इसके लिए रिजवान ने अन्य सदस्यों को दो बाइक भी मुहैया कराई थी।
अधिकारियों ने बताया कि पुणे माॅड्यूल के सदस्यों ने कट्टरपंथी नेटवर्क बनाने के लिए देशभर कई जगहों पर रेकी की थी, पश्चिमी घाट क्षेत्र के पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्रों में कई सप्ताह तक रहे। यह यहां पर ट्रेनिंग सेंटर खोलना चाहते थे। इसके लिए रिजवान ने अन्य सदस्यों को दो बाइक भी मुहैया कराई थी।
एक साल पहले पुणे गया था रिजवान
आईएसआईएस के पुणे माॅड्यूल का आतंकी रिजवान अली एक साल पहले पुणे गया था। उसका परिवार दरियागंज इलाके में फैज रोड पर रहता है। रिजवान की मां शाहीन का कहना है कि रिजवान ने एक साल पहले अल्फिया नाम की युवती से शादी की, उसके बाद वह पत्नी के साथ पुणे में कारोबार करने की बात कहकर चला गया था।।
आईएसआईएस के पुणे माॅड्यूल का आतंकी रिजवान अली एक साल पहले पुणे गया था। उसका परिवार दरियागंज इलाके में फैज रोड पर रहता है। रिजवान की मां शाहीन का कहना है कि रिजवान ने एक साल पहले अल्फिया नाम की युवती से शादी की, उसके बाद वह पत्नी के साथ पुणे में कारोबार करने की बात कहकर चला गया था।।
उसने वहां कंप्यूटर के पुर्जों का कारोबार करने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि उससे बीच-बीच में फोन पर बात होती थी। जब से उसके आतंकियों से जुड़े हाेने की खबर सुनी है तब से यकीन नहीं हो रहा है कि वह ऐसा कोई काम कर सकता है।
रिजवान ने जामिया से 2012 में बारहवीं की परीक्षा दी थी। उसके बाद उसने आगे की पढ़ाई छोड़कर छोटा-मोटा काम शुरू कर दिया। रिजवान पांच भाई बहनों में सबसे बड़ा है। उसके तीन भाई और दो बहनें हैं।
रिजवान के पिता अब्दुल हाजी सरकारी कर्मचारी रहे हैं। रिजवान की मां ने बताया कि दो साल पहले पुलिस ने किसी मामले में रिजवान से पूछताछ की थी, हालांकि बाद में पुलिस ने उसे छोड़ दिया था।