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Delhi NCR News: पाइपलाइन बदलने से पानी की सप्लाई होगी मजबूत
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-नंदनगरी फ्लाईओवर के पास ताहिरपुर मुख्य पाइपलाइन को शिफ्ट करने पर 3.18 करोड़ रुपये खर्च होंगे
- रेलवे ट्रैक के ऊपर होने से मरम्मत और रखरखाव है चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रेलवे लाइन के ऊपर से गुजर रही बड़ी पेयजल पाइपलाइन में भविष्य में खराबी आने पर मरम्मत की मुश्किल से बचने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने इसे शिफ्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। नंदनगरी फ्लाईओवर के पास मीत नगर की ओर से गुजर रही 900 एमएम की ताहिरपुर मुख्य पेयजल लाइन को नए स्थान पर ले जाया जाएगा। करीब 3.18 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे नंदनगरी, मीत नगर और आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों की मुख्य जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुचारु बनाने की उम्मीद है।
900 एमएम की यह पाइपलाइन मुख्य जलापूर्ति नेटवर्क का हिस्सा है। यह नंदनगरी फ्लाईओवर के पास रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरती है। किसी भी बड़ी खराबी, रिसाव या मरम्मत की जरूरत पड़ने पर रेलवे क्षेत्र में काम करना मुश्किल होता है।
इसी स्थिति को देखते हुए पाइपलाइन को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। परियोजना का उद्देश्य केवल नई पाइप बिछाना नहीं बल्कि मुख्य लाइन की भविष्य की मरम्मत और रखरखाव को भी आसान बनाना है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार राजधानी में जलापूर्ति करीब नौ हजार किलोमीटर लंबे जल मुख्य और वितरण नेटवर्क के माध्यम से की जाती है ऐसे में मुख्य लाइनों की स्थिति का सीधा असर बड़ी आबादी की आपूर्ति पर पड़ता है।
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इन इलाकों को होगा फायदा
इस पाइपलाइन से नंदनगरी, मीत नगर और इससे जुड़े आसपास के जलापूर्ति क्षेत्रों पर पड़ने की संभावना है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इस हिस्से में नंदनगरी, मीत नगर, मंडोली, सबोली और आसपास की कॉलोनियों में घनी आबादी रहती है। जल बोर्ड की अलग-अलग परियोजनाओं में भी मीत नगर, मंडोली, सबोली और आसपास के क्षेत्रों के जल नेटवर्क को मजबूत करने का काम चल रहा है। ऐसे में मुख्य लाइन की शिफ्टिंग को स्थानीय जलापूर्ति ढांचे को बेहतर बनाने की बड़ी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
नौ महीने में पूरा करना होगा काम
परियोजना की अनुमानित लागत 3.18 करोड़ रुपये है। प्रक्रिया पूरी होने और काम शुरू होने के बाद इसे नौ महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय लोगों के लिए असली राहत तभी होगी जब काम के दौरान पानी की आपूर्ति प्रभावित न हो और परियोजना पूरी होने के बाद मुख्य लाइन अधिक सुरक्षित ढंग से काम करे।
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- रेलवे ट्रैक के ऊपर होने से मरम्मत और रखरखाव है चुनौती
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में रेलवे लाइन के ऊपर से गुजर रही बड़ी पेयजल पाइपलाइन में भविष्य में खराबी आने पर मरम्मत की मुश्किल से बचने के लिए दिल्ली जल बोर्ड ने इसे शिफ्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है। नंदनगरी फ्लाईओवर के पास मीत नगर की ओर से गुजर रही 900 एमएम की ताहिरपुर मुख्य पेयजल लाइन को नए स्थान पर ले जाया जाएगा। करीब 3.18 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को नौ महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। इससे नंदनगरी, मीत नगर और आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों की मुख्य जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुचारु बनाने की उम्मीद है।
900 एमएम की यह पाइपलाइन मुख्य जलापूर्ति नेटवर्क का हिस्सा है। यह नंदनगरी फ्लाईओवर के पास रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरती है। किसी भी बड़ी खराबी, रिसाव या मरम्मत की जरूरत पड़ने पर रेलवे क्षेत्र में काम करना मुश्किल होता है।
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इसी स्थिति को देखते हुए पाइपलाइन को शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। परियोजना का उद्देश्य केवल नई पाइप बिछाना नहीं बल्कि मुख्य लाइन की भविष्य की मरम्मत और रखरखाव को भी आसान बनाना है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार राजधानी में जलापूर्ति करीब नौ हजार किलोमीटर लंबे जल मुख्य और वितरण नेटवर्क के माध्यम से की जाती है ऐसे में मुख्य लाइनों की स्थिति का सीधा असर बड़ी आबादी की आपूर्ति पर पड़ता है।
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इन इलाकों को होगा फायदा
इस पाइपलाइन से नंदनगरी, मीत नगर और इससे जुड़े आसपास के जलापूर्ति क्षेत्रों पर पड़ने की संभावना है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इस हिस्से में नंदनगरी, मीत नगर, मंडोली, सबोली और आसपास की कॉलोनियों में घनी आबादी रहती है। जल बोर्ड की अलग-अलग परियोजनाओं में भी मीत नगर, मंडोली, सबोली और आसपास के क्षेत्रों के जल नेटवर्क को मजबूत करने का काम चल रहा है। ऐसे में मुख्य लाइन की शिफ्टिंग को स्थानीय जलापूर्ति ढांचे को बेहतर बनाने की बड़ी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
नौ महीने में पूरा करना होगा काम
परियोजना की अनुमानित लागत 3.18 करोड़ रुपये है। प्रक्रिया पूरी होने और काम शुरू होने के बाद इसे नौ महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय लोगों के लिए असली राहत तभी होगी जब काम के दौरान पानी की आपूर्ति प्रभावित न हो और परियोजना पूरी होने के बाद मुख्य लाइन अधिक सुरक्षित ढंग से काम करे।