क्या अंधविश्वासी हो गए हैं नरेंद्र मोदी?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी 3 अप्रैल को गौतमबुद्घ नगर जिले की सीमा पर गरजेंगे लेकिन यहां आने का उनका कोई इरादा नहीं है।
मोदी गाजियाबाद के इंदिरापुरम में शिप्रा मॉल के पास जनसभा को संबोधित करेंगे। इस मंच से वह गाजियाबाद और गौतमबद्ध नगर सीटों के प्रत्याशियों को जिताने की अपील करते नजर आएंगे।
वहीं गौतमबुद्ध नगर जिले के भाजपा पदाधिकारियों को मोदी के उनके जिले में न आने का मलाल है। मोदी के यहां न आने के पीछे बहुत ही खास वजह है। विकास की बात करने वाले मोदी भी शायद अंधविश्वास पर भरोसा करने लगे हैं।
मोदी की रैली का ये भी है बड़ा कारण
गौतमबुद्व नगर जिले की सीमा पर मोदी की जनसभा को सफल बनाने में भाजपा के पदाधिकारी व कार्यकर्ता जी जान से जुटे हैं। लक्ष्य है कि जिले से 20 से 25 हजार कार्यकर्ता मोदी की सभा में पहुंचें।
नोएडा महानगर अध्यक्ष बिजेंद्र नागर ने बताया कि नरेंद्र मोदी की जनसभा नोएडा से सटे गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र में शिप्रा मॉल के पास सुबह 11 बजे होगी। इस सभा में नोएडा से भारी संख्या में कार्यकर्ता जाएंगे।
शहर के सभी मंडल अध्यक्षों को इस सभा को सफल बनाने के लिए लक्ष्य भी दिए गए हैं। उनके मुताबिक जिले की सीमा में होने वाली जनसभा का फायदा होगा। सभास्थल के आसपास नोएडा क्षेत्र की सेक्टर-62 में 49 अपार्टमेंट हैं। जिसमें लगभग पचास हजार मतदाता हैं। वहीं आस पास के गांवों में भी लाखों मतदाता हैं।
ऐसे पता चलता है मोदी का अंधविश्वास
राजनाथ सिंह हों या मायावती या फिर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा मुखिया मुलायम सिंह, इन सबके कदम गौतमबुद्घ नगर जिले की सीमा पर आते आते ठिठक जाते हैं।
इसके पीछे का कारण कुर्सी से दूर जाने का भय है। ऐसा कहा जाता है कि गौतमबुद्घ नगर जिले में आने वाला कोई भी मुख्यमंत्री दोबारा कुर्सी पर नहीं बैठ पाता और उसे करारी हार झेलनी पड़ती है।
यूपी के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बाद अब विकास पुरूष कहे जाने वाले बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी भी शायद कुर्सी के अंधविश्वास में पड़ गए हैं। लोगों का भी यही कहना है कि मोदी ने इसीलिए जनसभा स्थल जिले की सीमा पर बनवाया है। ताकि इससे दोनों बातें बन जाएं।
यहां आकर किसने गवांई अपनी कुर्सी?
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान डीएनडी का उद्घाटन नोएडा के बजाए दिल्ली से किया था। पिछले कार्यकाल में मायावती मुख्यमंत्री बनने के बाद जिले में आईं, लेकिन इस बार सत्ता की कुर्सी से दूर हो गईं।
मुलायम सिंह यादव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। यही कारण है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सत्ता की कुर्सी पर काबिज होते ही इस जिले से दूरी बनाने में लग गए।
कई हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का उद्घाटन नोएडा के बजाए लखनऊ से किया। इस बार के लोकसभा चुनाव में भी मुख्यमंत्री की जनसभा जिले की सीमा पर हुई। नरेंद्र मोदी की जनसभा भी जिले के बजाए उसकी सीमा पर होने को लोग इसी रूप में देख रहे हैं।