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Delhi NCR News: जेएनयू में भाषा, साहित्य और संस्कृति पर अंतरराष्ट्रीय युवा शोधकर्ता दो दिवसीय सम्मेलन
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-इस सम्मेलन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रूप में जारी रखने की योजना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में बृहस्पतिवार को दो दिवसीय(22-23 जनवरी) अंतरराष्ट्रीय युवा शोधकर्ता सम्मेलन की शुरुआत हुई। जेएनयू के भाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन स्कूल की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का विषय अनुसंधान में हाल के रुझान: भारतीय और विदेशी भाषाएं हैं। तीन साल पहले इस सम्मेलन की शुरुआत एक समावेशी शैक्षणिक मंच बनाने के विजन से हुई थी, जहां युवा शोधकर्ता स्कूल के सभी केंद्रों से भाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन में अपने विचारों का स्वतंत्र रूप से आदान-प्रदान कर सकें और अपने शोध अनुभवों को साझा कर सकें।
इसकी शुरुआत मामूली पहल के रूप में हुई थी। अब स्कूल इस सम्मेलन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रूप में जारी रखने की योजना बना रहा है। इसमें युवा विद्वान सवाल पूछेंगे, सोचेंगे और ज्ञान के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे। सम्मेलन के पहले दिन डीन और सम्मेलन की निदेशक प्रो शोभा शिव शंकरन ने कहा कि सर्वोच्च शिक्षा वह है जो हमें केवल जानकारी नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को सभी अस्तित्व के साथ सामंजस्य बिठाती है। सम्मेलन पर इस बात पर चर्चा हुई कि ऐसी कॉन्फ्रेंस भारतीय और विदेशी भाषाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसे भारत और विदेशों के विद्वानों के लिए एक अनोखा मंच प्रदान करना जारी रखना चाहिए।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में बृहस्पतिवार को दो दिवसीय(22-23 जनवरी) अंतरराष्ट्रीय युवा शोधकर्ता सम्मेलन की शुरुआत हुई। जेएनयू के भाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन स्कूल की ओर से आयोजित इस सम्मेलन का विषय अनुसंधान में हाल के रुझान: भारतीय और विदेशी भाषाएं हैं। तीन साल पहले इस सम्मेलन की शुरुआत एक समावेशी शैक्षणिक मंच बनाने के विजन से हुई थी, जहां युवा शोधकर्ता स्कूल के सभी केंद्रों से भाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन में अपने विचारों का स्वतंत्र रूप से आदान-प्रदान कर सकें और अपने शोध अनुभवों को साझा कर सकें।
इसकी शुरुआत मामूली पहल के रूप में हुई थी। अब स्कूल इस सम्मेलन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रूप में जारी रखने की योजना बना रहा है। इसमें युवा विद्वान सवाल पूछेंगे, सोचेंगे और ज्ञान के निर्माण में सार्थक योगदान देंगे। सम्मेलन के पहले दिन डीन और सम्मेलन की निदेशक प्रो शोभा शिव शंकरन ने कहा कि सर्वोच्च शिक्षा वह है जो हमें केवल जानकारी नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को सभी अस्तित्व के साथ सामंजस्य बिठाती है। सम्मेलन पर इस बात पर चर्चा हुई कि ऐसी कॉन्फ्रेंस भारतीय और विदेशी भाषाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसे भारत और विदेशों के विद्वानों के लिए एक अनोखा मंच प्रदान करना जारी रखना चाहिए।
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