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अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस: थाली में नहीं... निगाहों और इशारों में सजता है मेन्यू; ये कैफे है बेहद खास
Tue, 23 Sep 2025 06:11 AM IST
विजय पुंडीर
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
नितिन राजपूत, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Tue, 23 Sep 2025 06:11 AM IST
सार
हम बात कर रहे हैं। ‘इकोज-साउंड ऑफ साइलेंस’ का जहां बोलने की जरूरत नहीं, बस इशारों और सांकेतिक भाषा से ऑर्डर दिए जाते हैं।
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दक्षिणी दिल्ली में सत्य निकेतन स्थित मूक बधिरों की ओर से संचालित कैफे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी के सत्य निकेतन इलाके में एक ऐसा कैफे है, जहां की चुप्पी मन को जहां शांति देती हैं वहीं यहां काम करने वालों से सांकेतिक भाषा में वार्तालाप आपकी रचनात्मकता को बढ़ाती है। हम बात कर रहे हैं। ‘इकोज-साउंड ऑफ साइलेंस’ का जहां बोलने की जरूरत नहीं, बस इशारों और सांकेतिक भाषा से ऑर्डर दिए जाते हैं।
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स्वादिष्ट खाने के साथ ही समाज में दिव्यांगों के प्रति दृष्टिकोण को भी बदलने का यह कैफे कर रहा है। कैफे से निकलते समय एक ग्राहक से बात की तो उन्होंने एक झटके में कहा कि ‘इकोज’ केवल एक कैफे नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच है जहां ‘खामोशी’ ही सबसे बड़ी आवाज बनकर सामने आती है। कैफे के संस्थापक क्षितिज बेहल और अनुज ने बताया कि मूक-बधिर लोगों में अपार काबिलियत है, लेकिन संवाद की कमी के कारण वे समाज से कट जाते हैं। हमने इस कैफे के माध्यम से न सिर्फ उन्हें रोजगार दिया, बल्कि समाज को यह भी बताया कि बिना बोले भी बहुत कुछ कहा और किया जा सकता है।
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कैफे के कर्मचारी ग्राहकों को बुनियादी संकेत भाषा भी सिखाते हैं। यह संवाद की एक नई खिड़की खोलता है, जहां बोलने की बजाय समझने की भावना हावी होती है। कैफे में वरिष्ठ कैशियर के रूप में कार्यरत 45 वर्षीय प्रमोद बताते हैं कि पहले जब वह बेरोजगार थे तो लोग नकारात्मक नजरों से देखते थे। अब उन्हें और उनके जैसे अन्य कर्मियों को देखकर लोग प्रेरणा लेते हैं।
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पहली बार 2018 में मनाया गया यह दिवस
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने 2017 में सांकेतिक भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी। पहली बार इसे 2018 में मनाया गया। 23 सितंबर की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन विश्व बधिर महासंघ की स्थापना हुई थी। एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में करीब 70 मिलियन से अधिक मूक-बधिर लोग लोग रहते हैं जो लगभग 300 से अधिक सांकेतिक भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं।
कैफे में ग्राहकों को ऑर्डर देने में परेशानी न हो, इसके लिए दीवारों और मेन्यू कार्ड पर सांकेतिक भाषा के चिन्ह बनाए गए हैं। दिल पर हाथ रखने पर हरी चटनी, आंखों के इशारे से प्याज तो गाल पर हाथ रखने पर आ जाता है सॉफ्ट ड्रिंक।