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Delhi NCR News: हाईकोर्ट के आदेश में खुद ही जोड़ लिया अंतरिम राहत का पैराग्राफ
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- दिल्ली पुलिस कमिश्नर को 2 महीने में जांच पूरी करने के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक गंभीर अनियमितता का संज्ञान लिया। अदालत ने पाया कि उसके 19 नवंबर 2024 के एक आदेश में अंतरिम रोक दी गई वाला अतिरिक्त पैराग्राफ जोड़ा गया था। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की अदालत ने इस मामले में जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मेना देवी व अन्य बनाम दिल्ली सरकार व अन्य से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने खेर्रा खुर्द इलाके में संपत्ति हड़पने और धोखाधड़ी की शिकायत पर पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत का ध्यान आदेश में लिखी ‘अंतरिम रोक दी गई’ बात की ओर दिलाया। मूल आदेश में प्रतिवादियों के वकील को निर्देश लेने का समय दिया गया था। इसमें मामले को 14 जनवरी 2025 के लिए सूचीबद्ध करने और ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश था। किसी भी अंतरिम रोक का उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं के पास मौजूद प्रति में अंतरिम स्थगन को मंजूरी लिखा चौथा पैराग्राफ जोड़ा गया था। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इसे अदालत के आदेश में हेरफेर बताया।
न्यायिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर जोर
अदालत ने कहा कि इस पहलू की जांच आवश्यक है और उचित कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन दायर करने की अनुमति दी। वे दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी शिकायत दे सकते हैं। पुलिस आयुक्त को निर्देश है कि अभ्यावेदन मिलने के दो महीने के अंदर पूरी जांच कर कार्रवाई करें।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक गंभीर अनियमितता का संज्ञान लिया। अदालत ने पाया कि उसके 19 नवंबर 2024 के एक आदेश में अंतरिम रोक दी गई वाला अतिरिक्त पैराग्राफ जोड़ा गया था। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की अदालत ने इस मामले में जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला मेना देवी व अन्य बनाम दिल्ली सरकार व अन्य से संबंधित है। याचिकाकर्ताओं ने खेर्रा खुर्द इलाके में संपत्ति हड़पने और धोखाधड़ी की शिकायत पर पुलिस की निष्क्रियता का आरोप लगाया था। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत का ध्यान आदेश में लिखी ‘अंतरिम रोक दी गई’ बात की ओर दिलाया। मूल आदेश में प्रतिवादियों के वकील को निर्देश लेने का समय दिया गया था। इसमें मामले को 14 जनवरी 2025 के लिए सूचीबद्ध करने और ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड मंगाने का निर्देश था। किसी भी अंतरिम रोक का उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद याचिकाकर्ताओं के पास मौजूद प्रति में अंतरिम स्थगन को मंजूरी लिखा चौथा पैराग्राफ जोड़ा गया था। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इसे अदालत के आदेश में हेरफेर बताया।
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न्यायिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर जोर
अदालत ने कहा कि इस पहलू की जांच आवश्यक है और उचित कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन दायर करने की अनुमति दी। वे दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी शिकायत दे सकते हैं। पुलिस आयुक्त को निर्देश है कि अभ्यावेदन मिलने के दो महीने के अंदर पूरी जांच कर कार्रवाई करें।
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